
गुल्लक फोड़ो, जेवर बेचो तब होगी पढ़ाई… फीस वृद्धि के खिलाफ छत्तीसगढ़ माशिमं दफ्तर पर NSUI का अनोखा प्रदर्शन
रायपुर: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) द्वारा 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा शुल्क में की गई भारी बढ़ोतरी के खिलाफ आज NSUI के कार्यकर्ताओं ने रायपुर में जोरदार और अनोखा प्रदर्शन किया। छात्र नेता हाथ में गुल्लक (पिगी बैंक), जमीन के कागजात और सोने के जेवर लेकर माशिमं कार्यालय पहुंचे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब गरीब छात्रों को परीक्षा देने के लिए घर की संपत्ति बेचनी पड़ेगी?
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करीब 75% की भारी वृद्धि: आंकड़ों का खेल
NSUI नेता हेमंतपाल ने प्रदर्शन के दौरान बताया कि बोर्ड ने गुपचुप तरीके से लगभग 22 अलग-अलग मदों में फीस बढ़ा दी है, जो सीधे गरीब परिवारों की कमर तोड़ रही है:
- नियमित परीक्षा शुल्क: 460 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये किया गया।
- आवेदन पत्र शुल्क: 80 रुपये से बढ़ाकर 150-200 रुपये तक कर दिया गया।
- विलंब शुल्क (Late Fee): इसे भी बढ़ाकर 2,000 रुपये तक कर दिया गया है।
“बुनियादी सुविधाएं शून्य, फीस दुगनी क्यों?”
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि एक तरफ राज्य के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, कई स्कूलों में शौचालय तक नहीं हैं और किताबें समय पर नहीं पहुंचतीं, वहीं दूसरी तरफ सरकार ‘शिक्षा का व्यापार’ कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि पुरानी दरें तत्काल बहाल नहीं की गईं, तो यह आंदोलन ‘सड़क से सदन (विधानसभा)’ तक पहुंचेगा।

शिक्षा मंडल का तर्क: “5 साल बाद हुई बढ़ोतरी”
विरोध के बीच माध्यमिक शिक्षा मंडल की सचिव पुष्पा साहू ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पिछले 5 वर्षों से किसी भी मद में फीस नहीं बढ़ाई गई थी। पड़ोसी राज्यों के मुकाबले छत्तीसगढ़ में अब भी परीक्षा शुल्क कम है। यह फैसला वित्त और कार्यपालिका समिति की लंबी बैठकों के बाद शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए लिया गया है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि सत्र के बीच में इस तरह का आर्थिक बोझ डालना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप कर इस वृद्धि को वापस लेने की मांग की है।
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