
Bilaspur में आदिवासी सम्मेलन: भूपेश बघेल ने राज्य सरकार और RSS पर साधा निशाना
बिलासपुर, 11 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोटा में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर एक विशाल आदिवासी सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य की भाजपा सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री के बावजूद सरकार आदिवासियों के हितों की रक्षा करने में विफल रही है और RSS के दबाव में नीतियां बना रही है।

आदिवासियों की अनदेखी का आरोप
बघेल ने अपने संबोधन में कहा, “छत्तीसगढ़ की एक तिहाई से अधिक आबादी आदिवासियों की है, जो इस राज्य की सांस्कृतिक पहचान हैं। लेकिन वर्तमान सरकार उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है। RSS के इशारे पर विश्व आदिवासी दिवस जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों का बहिष्कार किया गया, जो आदिवासी संस्कृति का अपमान है।” उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने आदिवासियों के लिए सामुदायिक वन अधिकार, शिक्षा और रोजगार जैसी योजनाएं शुरू की थीं, लेकिन मौजूदा सरकार ने इन योजनाओं को कमजोर कर दिया।

जंगल कटाई और वोट चोरी का मुद्दा
पूर्व मुख्यमंत्री ने हसदेव अरण्य में जंगल कटाई का मुद्दा उठाते हुए कहा, “हमारी सरकार ने हसदेव में पेड़ों की कटाई रोकने के लिए विधानसभा में संकल्प पारित किया था, लेकिन अब बड़े उद्योगपतियों के हित में जंगल उजाड़े जा रहे हैं।” उन्होंने वोट चोरी का भी गंभीर आरोप लगाया और कहा, “कांकेर, पत्थलगांव और अंबिकापुर जैसी सीटें चोरी के वोट से हारी गईं। चुनाव आयोग बीजेपी का ‘आनुषंगिक संगठन’ बन चुका है।”
RSS पर तीखा हमला
बघेल ने RSS पर निशाना साधते हुए कहा, “RSS आदिवासियों की सांस्कृतिक पहचान को मिटाने की कोशिश कर रहा है। वनवासी कल्याण आश्रम के बयान से साफ है कि वे विश्व आदिवासी दिवस को अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र मानते हैं। यह आदिवासी समुदाय का अपमान है।” उन्होंने कहा कि भाजपा आदिवासियों को केवल वोट बैंक के रूप में देखती है और उनकी संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही।
आदिवासी समाज की मांगें
सम्मेलन में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग और स्थानीय नेता शामिल हुए। आदिवासी संगठनों ने शिक्षा, रोजगार, और जमीन के अधिकारों जैसे मुद्दों पर सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की। एक स्थानीय नेता ने कहा, “हमारी जमीन और संस्कृति हमारी पहचान हैं। सरकार को इनकी रक्षा के लिए ठोस नीतियां बनानी होंगी।”
सियासी हलचल तेज
इस सम्मेलन ने छत्तीसगढ़ की सियासत में हलचल मचा दी है। बघेल के बयानों ने जहां एक ओर आदिवासी समुदाय में उत्साह जगाया है, वहीं भाजपा सरकार पर दबाव भी बढ़ा है। विश्लेषकों का मानना है कि आदिवासी वोट बैंक छत्तीसगढ़ की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है, और बघेल के ये बयान आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया
हालांकि, इस सम्मेलन को लेकर राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। दूसरी ओर, पुलिस ने आयोजन के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। स्थानीय प्रशासन ने भी भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था की थी।
निष्कर्ष
बिलासपुर में आयोजित इस आदिवासी सम्मेलन ने न केवल आदिवासी समुदाय के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया, बल्कि राज्य सरकार और RSS की नीतियों पर भी सवाल उठाए। भूपेश बघेल का यह हमला छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत का संकेत दे सकता है।
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