
Bilaspur के 15 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग System : ट्रेनों की पारिस्थितिक सुरक्षा के लिए अहम परियोजना
बिलासपुर, 1 अक्टूबर 2025: भारतीय रेलवे ने ट्रेन संचालन की सुरक्षा और दक्षता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के बिलासपुर रेल मंडल के 15 रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम (ईआई) स्थापित करने की परियोजना को रेलवे बोर्ड ने औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस परियोजना पर लगभग 298.60 करोड़ रुपये का खर्च होने का अनुमान है, जो न केवल ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन को सुनिश्चित करेगी, बल्कि यात्रियों की पारिस्थितिक सुरक्षा को भी मजबूत बनाएगी। यह कदम रेलवे की डिजिटल क्रांति का हिस्सा है, जो आधुनिक तकनीक के माध्यम से दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने पर केंद्रित है।

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम क्या है?
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम (ईआई) रेलवे सिग्नलिंग का एक उन्नत रूप है, जो पारंपरिक यांत्रिक या पैनल इंटरलॉकिंग प्रणालियों की तुलना में कहीं अधिक विश्वसनीय और कुशल होता है। यह सिस्टम कंप्यूटर-आधारित नियंत्रण केंद्र के माध्यम से सिग्नल, पॉइंट्स (स्विच) और ट्रैक सर्किट्स को एकीकृत रूप से प्रबंधित करता है। ईआई में सभी संचालन डिजिटल मोड में होते हैं, जहां एक केंद्रीय प्रोसेसर सिग्नलों को स्वचालित रूप से नियंत्रित करता है। इससे मानवीय त्रुटियों की संभावना लगभग शून्य हो जाती है।
पारंपरिक सिस्टम में जहां लेवर या मैनुअल स्विच का उपयोग होता था, वहीं ईआई में माउस क्लिक या टचस्क्रीन के माध्यम से ट्रेनों का रूटिंग किया जाता है। यह प्रणाली रीयल-टाइम डेटा एनालिसिस पर आधारित है, जो ट्रेन की गति, दूरी और संभावित जोखिमों को तुरंत पहचान लेती है। एसईसीआर में पहले से ही 159 स्टेशनों पर ईआई लागू हो चुका है, और यह नई परियोजना बिलासपुर मंडल के शेष पैनल इंटरलॉकिंग (पीआई) स्टेशनों को अपग्रेड करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
परियोजना के प्रमुख लाभ
यह परियोजना ट्रेनों के परिचालन को न केवल सुरक्षित बनाएगी, बल्कि दक्षता में भी वृद्धि करेगी। प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
बढ़ी हुई सुरक्षा: ईआई सिस्टम ‘कवच’ (स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) के साथ एकीकृत होगा, जो रीयल-टाइम सिग्नल डेटा साझा करेगा। इससे आमने-सामने की टक्कर या सिग्नल पास करने की घटनाओं को रोका जा सकेगा। बिलासपुर जोन में पहले से ही ‘कवच’ का विस्तार हो रहा है, और यह परियोजना इसे और मजबूत करेगी।

तेज ट्रेन संचालन: स्टेशनों की ट्रैक क्षमता बढ़ जाएगी, जिससे अधिक ट्रेनें निर्धारित समय पर चल सकेंगी। इससे यात्रियों को कम देरी और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
पर्यावरणीय लाभ: डिजिटल सिस्टम ऊर्जा-कुशल है, जो पारंपरिक सिस्टम की तुलना में कम रखरखाव और बिजली की खपत करता है। इससे रेलवे की पारिस्थितिक सुरक्षा (इकोलॉजिकल सेफ्टी) में योगदान मिलेगा, क्योंकि कम यांत्रिक भागों से प्रदूषण और अपशिष्ट कम होगा।
आपातकालीन प्रतिक्रिया: सिस्टम में एल्गोरिदम-आधारित अलर्ट सिस्टम है, जो किसी भी असामान्य स्थिति (जैसे ट्रेन की असामान्य गति या बाधा) में तुरंत ब्रेकिंग या डायवर्जन का संकेत देगा।
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