
Bilaspur High Court: बिना पूर्ण पेनिट्रेशन प्राइवेट पार्ट रगड़ना रेप नहीं, प्रयास माना जाएगा; आरोपी की सजा आधी
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी प्रकरण में पूर्ण पेनिट्रेशन (प्रवेश) सिद्ध नहीं होता और केवल प्राइवेट पार्ट को रगड़ने की घटना प्रमाणित होती है, तो इसे कानून की नजर में दुष्कर्म नहीं माना जाएगा, बल्कि दुष्कर्म का प्रयास (अटेम्प्ट टू रेप) माना जाएगा।
अदालत ने इसी आधार पर आरोपी की सजा में आंशिक राहत देते हुए उसे आधी कर दी।
क्या कहा हाईकोर्ट ने?
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि दुष्कर्म के अपराध के लिए भारतीय दंड संहिता (या वर्तमान में लागू प्रावधानों) के तहत पेनिट्रेशन का साबित होना आवश्यक तत्व है। यदि साक्ष्यों से यह स्थापित नहीं होता कि पूर्ण प्रवेश हुआ, तो अपराध की श्रेणी बदलकर “रेप का प्रयास” मानी जाएगी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल बाहरी रगड़ या छेड़छाड़ की स्थिति में इसे दुष्कर्म की पूर्ण परिभाषा में नहीं रखा जा सकता।
सजा में मिली राहत
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले की समीक्षा की। साक्ष्यों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर यह पाया गया कि पूर्ण पेनिट्रेशन प्रमाणित नहीं हुआ।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने आरोपी को दी गई सजा में संशोधन करते हुए उसे आधा कर दिया। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार का कृत्य गंभीर अपराध है और कानून इसके प्रति सख्त है।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी जानकारों के अनुसार, यह फैसला दुष्कर्म और दुष्कर्म के प्रयास के बीच कानूनी अंतर को स्पष्ट करता है। न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर अपराध की प्रकृति तय करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
यह निर्णय भविष्य में समान प्रकृति के मामलों में महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में देखा जा सकता है।
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