
Bilaspur: बार-बार आत्महत्या की धमकी देना मानसिक क्रूरता—Chhattisgarh High Court ने तलाक आदेश को बरकरार रखा
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: आत्महत्या की धमकी भी मानसिक प्रताड़ना
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि दांपत्य जीवन में बार-बार आत्महत्या की धमकी देना मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) के दायरे में आता है।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे व्यवहार से दूसरे जीवनसाथी पर असहनीय मानसिक दबाव पड़ता है, जिससे वैवाहिक जीवन चलाना कठिन हो जाता है।

फैमिली कोर्ट के तलाक आदेश को हाईकोर्ट ने माना सही
यह मामला फैमिली कोर्ट के निर्णय से जुड़ा हुआ था, जिसमें पति को तलाक देने का आदेश दिया गया था। पत्नी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील की थी।
हालांकि, हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी।
कोर्ट ने माना—धमकी से वैवाहिक जीवन पर पड़ता है गंभीर प्रभाव
कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि आत्महत्या जैसी चरम घटना की बार-बार धमकी देना एक प्रकार की भावनात्मक ब्लैकमेलिंग है।
इसका उद्देश्य अक्सर जीवनसाथी को नियंत्रित करना, डराना या किसी कार्रवाई के लिए मजबूर करना होता है, जो मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है।
पति ने लगाए थे गंभीर आरोप, कोर्ट ने माना व्यवहार असहनीय
मामले में पति ने अपनी याचिका में बताया कि पत्नी अक्सर विवाद के दौरान आत्महत्या की धमकी देती थी, जिससे परिवार का माहौल तनावपूर्ण हो चुका था।
पति ने कहा कि इस वजह से उसे निरंतर भय और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा, जिससे वैवाहिक संबंध असहनीय हो गए।
मानसिक क्रूरता मामलों में उपयोगी मिसाल
हाईकोर्ट का यह फैसला वैवाहिक विवादों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल माना जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय स्पष्ट करता है कि घरेलू विवादों में केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक प्रताड़ना भी तलाक का आधार बन सकती है।
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