
High Court का बड़ा फैसला, मनरेगा तकनीकी सहायकों के तबादले पर लगा रोक
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कार्यरत तकनीकी सहायकों के तबादलों पर बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने अंतरिम राहत देते हुए तबादला आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
बिना अधिकार जारी हुआ तबादला आदेश
मामला बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में पदस्थ तकनीकी सहायक टिकमचंद कौशिक और सूर्यबली सिंह से जुड़ा है, जिनका तबादला 4 दिसंबर 2025 को कलेक्टर सह कार्यक्रम समन्वयक द्वारा किया गया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए दोनों ने हाईकोर्ट में अलग-अलग रिट याचिकाएं दाखिल की थीं।
हाईकोर्ट में क्या दलील दी गई?
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता श्रीकांत कौशिक ने अदालत को बताया कि राज्य शासन ने 16 मई 2023 को ही कलेक्टर और संभागायुक्त से तकनीकी सहायकों के तबादले का अधिकार वापस ले लिया था। इसके बावजूद दिसंबर 2025 में तबादला आदेश जारी किया गया, जो प्रथम दृष्टया अवैध और अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

हाईकोर्ट का सख्त रुख
दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू ने याचिकाकर्ताओं से संबंधित तबादला आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने राज्य शासन और संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई मार्च 2026 में होगी।
कर्मचारियों के लिए अहम फैसला
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश मनरेगा के तहत कार्यरत तकनीकी सहायकों और अन्य कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण नजीर साबित हो सकता है। इससे यह संदेश साफ गया है कि बिना वैधानिक अधिकार के जारी प्रशासनिक आदेशों पर न्यायालय सख्त रुख अपनाएगा।
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