February 1, 2026
रेप के आरोपी डॉक्टर को High Court से बड़ा झटका, FIR रद्द करने की याचिका खारिज

रेप के आरोपी डॉक्टर को High Court से बड़ा झटका, FIR रद्द करने की याचिका खारिज

Jan 30, 2026

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बलात्कार के आरोपी डॉक्टर की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में प्रारंभिक चरण पर एफआईआर या आरोपपत्र को रद्द करना उचित नहीं है। आरोपी डॉक्टर विजय उमाकांत वाघमारे (33 वर्ष) ने अपने खिलाफ दुर्ग जिले के भिलाई नगर थाने में दर्ज मामले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी, जिसे मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने खारिज कर दिया।

क्या है मामला?

याचिकाकर्ता विजय उमाकांत वाघमारे पेशे से एमएस ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं और महाराष्ट्र के लातूर जिले के निवासी हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने शादी का झांसा देकर एक महिला के साथ दो बार शारीरिक संबंध बनाए। शिकायत के आधार पर भिलाई नगर थाने में 2018 में अपराध दर्ज हुआ था। पुलिस ने विवेचना पूरी कर 3 अक्टूबर 2025 को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत कोर्ट में आरोपपत्र (Charge Sheet) पेश किया, जिस पर निचली अदालत ने संज्ञान लिया था। इसी संज्ञान और एफआईआर को रद्द कराने डॉक्टर हाईकोर्ट पहुँचे थे।

आरोपी डॉक्टर के तर्क: “मैं तो पुणे के अस्पताल में ड्यूटी पर था”

डॉक्टर की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। उनके वकील ने तर्क दिया कि कथित घटना के समय आरोपी पुणे के ससून जनरल अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टर थे और अस्पताल के रजिस्टर के अनुसार वे निरंतर ड्यूटी पर थे।एफआईआर दर्ज होने में 19 महीने की देरी हुई है। शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा विवाह के लिए अनुचित दबाव बनाया जा रहा था। दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से थे।

हाईकोर्ट का रुख: “मिनी ट्रायल नहीं कर सकते”

राज्य सरकार की ओर से इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा गया कि ये सभी तथ्यात्मक विवाद हैं, जिनका फैसला केवल ट्रायल (विचारण) के दौरान साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकता है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि इस स्तर पर साक्ष्यों का सूक्ष्म मूल्यांकन या ‘मिनी ट्रायल’ करना संभव नहीं है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी के पास ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपनी बेगुनाही साबित करने के पर्याप्त अवसर होंगे, लेकिन उपलब्ध सामग्रियों के आधार पर प्रथम दृष्टया अपराध बनता दिख रहा है, इसलिए कार्यवाही को रद्द नहीं किया जा सकता।

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