
भूपेश Cabinet में FL-10 लाइसेंस को मिली थी मंजूरी, अब EOW चालान में हुआ जिक्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में शराब नीति को लेकर एक बार फिर से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की चार्जशीट में यह खुलासा हुआ है कि भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल के दौरान कैबिनेट ने FL-10 लाइसेंस को मंजूरी दी थी। इस मंजूरी का जिक्र अब ईओडब्ल्यू की जांच और चालान में सामने आया है।

क्या है मामला?
EOW ने हाल ही में दाखिल अपने चालान में बताया है कि भूपेश कैबिनेट के दौरान शराब वितरण और बिक्री को लेकर कई अहम फैसले लिए गए थे। इनमें FL-10 लाइसेंस का मामला भी शामिल है, जिसके जरिए ठेकेदारी और कमीशनखोरी का रास्ता खुला बताया जा रहा है।
रमन सिंह का बयान
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इसे “राजनीति का सबसे बड़ा क्राइम” बताया है। रमन का कहना है कि शराब नीति के नाम पर जनता को गुमराह किया गया और अब जांच में सामने आ रहे तथ्य यह साबित कर रहे हैं कि उस दौरान बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएँ हुई थीं।

बैज का हमला
भाजपा नेता ओपी चौधरी उर्फ बैज ने सवाल उठाया कि केवल फाइलों में मंजूरी की बात सामने आना ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा – “मामला केवल लाइसेंस देने तक सीमित नहीं है। इसमें कमीशनखोरी का बड़ा खेल हुआ है। खासकर 3% कमीशन की जांच कौन करेगा? जब तक इस पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सच सामने नहीं आएगा।”
EOW की कार्रवाई
EOW ने अपनी जांच में यह पाया है कि शराब वितरण और उसके लाइसेंसिंग में राजनीतिक दबाव और कमीशन की भूमिका अहम रही है। अब इस मामले में आरोप तय करने और आगे की जांच के लिए कोर्ट में पेश चालान पर सुनवाई होगी।

राजनीतिक असर
भूपेश बघेल की सरकार पर पहले भी शराब घोटाले को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं। अब EOW के चालान में सीधे-सीधे कैबिनेट मंजूरी का जिक्र होने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा लगातार इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बता रही है।
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