
भारतमाला मुआवजा घोटाले में EOW की बड़ी कार्रवाई
छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण में मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने इस मामले में जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारियों सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया है। यह घोटाला रायपुर से विशाखापट्टनम तक प्रस्तावित फोरलेन और सिक्सलेन सड़क परियोजना से जुड़ा है, जिसमें सरकारी खजाने को 48 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
गिरफ्तार किए गए आरोपी
EOW ने जल संसाधन विभाग के रिटायर्ड अमीन गोपाल राम वर्मा और नरेंद्र कुमार नायक के साथ-साथ चार अन्य व्यक्तियों—खेमराज कोसले, पुनुराम देशलहरे, भोजराम साहू और कुंदन बघेल—को गिरफ्तार किया है। इनमें से कुछ आरोपी प्रभावशाली पदों पर रह चुके हैं, जैसे खेमराज कोसले, जो पूर्व जिला पंचायत सदस्य और अभनपुर जनपद अध्यक्ष रह चुके हैं, और कुंदन बघेल, जो 10 वर्षों तक नगर पंचायत अभनपुर के अध्यक्ष रहे।
हेराफेरी का तरीका
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों और गलत रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा राशि में हेराफेरी की। पहले से अधिग्रहित भूमि को दोबारा शासन को बेचकर, गलत व्यक्तियों को मुआवजा देकर और जमीन को टुकड़ों में बांटकर मुआवजा राशि बढ़ाई गई। अभनपुर के नायकबांधा और उरला में 559 मीटर जमीन की कीमत 29.5 करोड़ से बढ़ाकर 78 करोड़ रुपये दिखाई गई।
EOW की कार्रवाई
EOW और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने इस मामले में गहन जांच शुरू की है। 25 अप्रैल 2025 को 20 ठिकानों पर छापेमारी के बाद महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। गिरफ्तार आरोपियों को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां गोपाल राम वर्मा और नरेंद्र कुमार नायक को 23 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि अन्य चार को 18 जुलाई तक EOW की रिमांड पर भेजा गया।
फरार अधिकारियों पर नजर
इस घोटाले में शामिल कुछ प्रमुख राजस्व अधिकारी, जैसे तत्कालीन एसडीएम निर्भय कुमार साहू, तहसीलदार शशिकांत कुर्रे, नायब तहसीलदार लखेश्वर किरण और तीन पटवारी अभी भी फरार हैं। इनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं, और EOW उनकी तलाश में जुटी है। रायपुर की विशेष अदालत ने इन अधिकारियों को 29 जुलाई 2025 तक कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है, अन्यथा उनकी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई होगी।
सरकार और NHAI की प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने मुआवजा वितरण में अनियमितताओं पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद भुगतान प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया। राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए EOW और ACB को जांच सौंपी है। जांच में घोटाले की राशि 48 करोड़ से बढ़कर 600 करोड़ रुपये तक होने की आशंका जताई जा रही है।
भविष्य की कार्रवाई
EOW की जांच अभी जारी है, और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। जांच एजेंसी फर्जी दस्तावेजों के निर्माण में शामिल अन्य व्यक्तियों और अधिकारियों की तलाश कर रही है। सरकार और जांच एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से ले रही हैं ताकि दोषियों को सजा मिले और भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी को रोका जा सके।
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