
भारत पर इजरायल-ईरान युद्ध के प्रभाव: तेल की कीमतों में उछाल, व्यापार और उड्डयन पर असर
नई दिल्ली, 15 जून 2025:
इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है, और इसके प्रभाव भारत में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। इजरायल द्वारा ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई ने पश्चिम एशिया में एक नए युद्ध की आशंका को बढ़ा दिया है। इस संघर्ष का भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति, और परिवहन क्षेत्र पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है।
तेल की कीमतों में उछाल
विशेषज्ञों का कहना है कि इस संघर्ष के कारण वैश्विक तेल की कीमतों में 8-10% की वृद्धि हुई है। भारत, जो अपनी तेल आवश्यकताओं का लगभग 80% आयात करता है, इस मूल्य वृद्धि से प्रभावित हो रहा है। यदि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी वास्तविकता में बदलती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति का 20-25% हिस्सा प्रभावित हो सकता है, जो भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों को और बढ़ा सकता है।

जेपी मॉर्गन ने चेतावनी दी है कि तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे भारत में मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटा बढ़ सकता है।
निर्यात लागत में 40-50% की वृद्धि
इजरायल-ईरान संघर्ष के कारण स्वेज नहर और लाल सागर के रास्ते बंद होने की आशंका है, जिससे भारतीय निर्यातकों को लंबे समुद्री मार्गों, जैसे केप ऑफ गुड होप, का उपयोग करना पड़ सकता है। इससे शिपिंग लागत में 40-50% की वृद्धि हो सकती है और प्रति कंटेनर 500-1000 डॉलर का अतिरिक्त खर्च आएगा। इसके अलावा, शिपिंग समय में 15-20 दिनों की देरी होने की संभावना है, जो भारत के व्यापार को प्रभावित करेगा।
उड्डयन क्षेत्र पर असर
ईरान द्वारा अपने हवाई क्षेत्र को बंद करने के बाद, भारत और पश्चिमी देशों के बीच उड़ानें प्रभावित हुई हैं। एयर इंडिया की कम से कम 16 उड़ानें, जिनमें लंदन, न्यूयॉर्क और दिल्ली के बीच की उड़ानें शामिल हैं, को या तो डायवर्ट किया गया या वापस लौटना पड़ा। लंबे मार्गों के उपयोग के कारण उड़ानों की लागत और समय में वृद्धि हुई है।

भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा
पश्चिम एशिया में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है। विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने और स्थानीय दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। ईरान में 1,595 भारतीय छात्र, जिनमें तेहरान विश्वविद्यालय के 140 मेडिकल छात्र शामिल हैं, इस तनाव के बीच फंसे हुए हैं|
भारत की कूटनीतिक प्रतिक्रिया
भारत ने इस संघर्ष पर चिंता जताते हुए दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीति के रास्ते अपनाने की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं और परमाणु स्थलों पर हमलों की खबरों से चिंतित हैं।” भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के उस बयान से भी खुद को अलग कर लिया, जिसमें इजरायल के हमलों की निंदा की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बातचीत में शांति और स्थिरता की बहाली पर जोर दिया।
आर्थिक प्रभाव
भारत के शेयर बाजार भी इस तनाव से प्रभावित हुए हैं, सेंसेक्स में शुक्रवार को 573 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो भारत में मुद्रास्फीति बढ़ने और आर्थिक विकास पर असर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने और रणनीतिक भंडार को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
निष्कर्ष
इजरायल-ईरान युद्ध ने भारत के सामने आर्थिक और कूटनीतिक चुनौतियां पेश की हैं। तेल की कीमतों में वृद्धि, व्यापार लागत में इजाफा, और उड्डयन क्षेत्र में व्यवधान भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रहे हैं। भारत सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन कर रही है।
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