
Bharatऔर चीन के संबंधों में 2025 में आ रही मजबूती राजनैतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो रही है।
राजनैतिक वार्ता और उच्च स्तरीय मुलाकातें
अगस्त 2025 में चीन के विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा ने इस thaw की शुरुआत की, जहां उन्होंने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के साथ सीमा विवाद, व्यापार और सहयोग के मुद्दों पर गहन वार्ता की। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि वे अगस्त के अंत में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए चीन के तियानजिन शहर का दौरा करेंगे और वहां वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। यह मोदी का चीन का पहला दौरा होगा, जो 7 साल बाद हो रहा है।

अर्थव्यवसाय और सीमा व्यापार में पुनः सृजन
दोनों देशों ने सीमा व्यापार शुरू करने, स्थानीय उपभोक्ता वस्तुओं के आदान-प्रदान को पुनः शुरू करने और कोविड-19 के कारण बंद हुई सीधी हवाई उड़ानों को पुनर्जीवित करने के लिए सहमति जताई। साथ ही, काइلاش मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने जैसे सांस्कृतिक पथों की बहाली भी इस रिश्ते की मजबूती का संकेत है।
तनाव को कम करने की कोशिशें
सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से सीमा विवाद के शान्तिपूर्ण और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के लिए वार्ता जारी है। चीन ने सीमा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने का आश्वासन दिया है, जबकि भारत ने बातचीत के लिए सकारात्मक रूख अपनाया है। दोनों देशों के बीच हाल ही में 10 बिंदुओं पर समझौता हुआ है, जिसमें सीमा पर ‘शांति और सुकून’ बनाए रखने का संकल्प शामिल है।
आर्थिक सहयोग का विस्तार
चीन ने भारत को उर्वरक, दुर्लभ उपादान और सुरंग खोदने की मशीनों जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति फिर से शुरू करने की बात कही है। भारत की नीति आयोग भी चीनी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नियमों में नरमी की सिफारिश कर रही है, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ेगा।

वैश्विक संदर्भ और रणनीतिक स्वायत्तता
यह सुधार वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है, खासकर अमेरिका के भारत पर बढ़ते व्यापार प्रतिबंधों और टैरिफ के बीच। चीन और भारत दोनों ने इस दबाव के कारण अपने संबंधों को संतुलित करने पर जोर दिया है। भारत की विदेश नीति में ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की नीति स्पष्ट है, जिसमें राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं।
आने वाले रोमांचक दौर की उम्मीद
SCO सम्मेलन में होने वाली मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दे सकती है। सीमा सवाल, क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद से लड़ाई, और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे बातचीत के प्रमुख विषय होंगे। यह बातचीत दोनों देशों के बीच विश्वास पुनर्निर्माण और पूंजी निवेश एवं व्यापार के नए अवसरों के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगी।
इस तरह 2025 में भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे तनावपूर्ण दौर से निकलकर सहयोग के रास्ते पर अग्रसर हैं, जो क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्थिरता के लिए लाभकारी होगा, हालांकि सीमा विवाद पूरी तरह सुलझा नहीं है और यह सबसे बड़ा चैलेंज बना हुआ है।
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