
भारत ने उठाया सख्त कदम! व्यापार वार्ता के बीच WTO में अमेरिका के खिलाफ इस्पात और एल्युमीनियम पर जवाबी शुल्क की योजना; विवरण देखें
11 जुलाई , 25
प्रस्तावना: भारत का जवाबी रुख
भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के तहत अमेरिका द्वारा इस्पात और एल्युमीनियम पर लगाए गए शुल्कों के खिलाफ जवाबी शुल्क लगाने का प्रस्ताव संशोधित किया है। यह कदम अमेरिकी प्रशासन द्वारा हाल ही में शुल्क में वृद्धि के जवाब में उठाया गया है, जो भारत के $7.6 बिलियन के निर्यात को प्रभावित करता है। यह प्रस्ताव दोनों देशों के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की वार्ता के बीच महत्वपूर्ण है।
अमेरिकी शुल्कों का इतिहास
पहले ट्रम्प प्रशासन ने 2018 में राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर कुछ इस्पात उत्पादों पर 25% और एल्युमीनियम उत्पादों पर 10% शुल्क लगाया था। इसके जवाब में, भारत ने जून 2019 में बादाम, अखरोट सहित 28 अमेरिकी उत्पादों पर सीमा शुल्क लगाया था और WTO में शिकायत दर्ज की थी। हाल ही में, अमेरिका ने मार्च 2025 में इस्पात और एल्युमीनियम पर शुल्क को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया, जिसके कारण भारत ने जवाबी कार्रवाई की योजना बनाई।
भारत की जवाबी शुल्क योजना
भारत ने WTO को सूचित किया है कि वह अमेरिका से आयातित चुनिंदा उत्पादों पर शुल्क बढ़ाकर जवाबी कार्रवाई करेगा, ताकि अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाए गए $3.82 बिलियन के शुल्क के बराबर राशि वसूल की जा सके। मई में, भारत ने $1.9 बिलियन के शुल्क की वसूली का प्रस्ताव दिया था, लेकिन अमेरिका द्वारा शुल्क दोगुना करने के बाद इसे बढ़ाकर $3.82 बिलियन कर दिया गया।
द्विपक्षीय व्यापार वार्ता पर प्रभाव
यह जवाबी शुल्क प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत कर रहे हैं, जिसका पहला चरण सितंबर-अक्टूबर तक पूरा होने की उम्मीद है। भारतीय टीम अगले सप्ताह व्यापार वार्ता के लिए वाशिंगटन का दौरा करने वाली है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तनातनी दोनों देशों के बीच बातचीत को जटिल बना सकती है, लेकिन एक भारतीय अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह WTO नियमों के तहत एक प्रक्रियात्मक कदम है और व्यापार वार्ता पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भारत का दृढ़ रुख
भारत ने WTO को बताया कि वह 30 दिनों की परामर्श अवधि के बाद रियायतों को निलंबित करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। यह कदम भारत के उस दृढ़ रुख को दर्शाता है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए कठोर कदम उठाने से नहीं हिचकेगा। भारत ने पहले भी 2019 में इसी तरह की जवाबी कार्रवाई की थी और अब वह अमेरिका के साथ समान सम्मान और पारस्परिकता के आधार पर संबंध बनाए रखने की दिशा में काम कर रहा है।
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