
भारत ने रूस-बेलारूस के ‘ज़ापाड 2025’ सैन्याभ्यास में लिया हिस्सा, America में बढ़ी Tension
भारत ने हाल ही में रूस और बेलारूस के संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘ज़ापाड 2025’ में भाग लिया। इस अभ्यास का आयोजन रूस और बेलारूस ने बड़े पैमाने पर किया, जिसमें 1 लाख से अधिक सैनिक, 333 फाइटर जेट, 247 नेवी शिप्स और पनडुब्बियां शामिल थीं। भारत की तरफ से कुमाऊं रेजिमेंट के 65 सैनिक इस अभ्यास में शामिल हुए। भारतीय रक्षा मंत्रालय और रूसी मीडिया दोनों ने इसकी पुष्टि की है।

ज़ापाड 2025 का उद्देश्य और महत्व
‘ज़ापाड’ (जापाड) का अर्थ है ‘पश्चिम’। यह अभ्यास रूस और बेलारूस की सामूहिक सुरक्षा और रक्षा तैयारियों की जांच के लिए किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य है अपने युद्ध कौशल को मजबूत करना, सामरिक सहयोग को बढ़ाना और नाटो देशों के खिलाफ सामरिक सामंजस्य स्थापित करना। यह अभ्यास 41 विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों पर हुआ, जहां युद्ध की स्थिति में सेना की तत्परता, सामरिक परिचालन और आधुनिक हथियार प्रणाली का परीक्षण किया गया।
भारत की भागीदारी
भारत ने इस अभ्यास में कुमाऊं रेजिमेंट की 65 सैनिक टुकड़ी भेजी, जो रूस और बेलारूस की सेनाओं के साथ संयुक्त प्रशिक्षण, सामरिक युद्ध तकनीक और परस्पर समन्वय को बेहतर बनाने में लगी रही। यह पहला मौका है जब भारत ने इस प्रकार के बड़े बहुपक्षीय अभ्यास में हिस्सा लिया है जिसमें रूस के इतने करीबी सहयोगी बेलारूस भी शामिल है। भारत की इस भागीदारी से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि वह अपनी बहुपक्षीय रक्षा नीति और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना चाहता है।
अमेरिका और नाटो की चिंता
रूस और बेलारूस के इस बड़े सैन्य अभ्यास पर अमेरिका और नाटो की कड़ी नजर थी। पश्चिमी देशों के लिए यह अभ्यास तनाव का विषय है क्योंकि वे रूस के सैन्य गतिवधियों से पहले ही चिंतित हैं, खासतौर पर रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण। भारत की इस अभ्यास में हिस्सेदारी से अमेरिका और उसके सहयोगियों में चिंता बढ़ सकती है, खासकर वैश्विक कूटनीति एवं व्यापार मुद्दों के बीच। अमेरिका पहले भी भारत के रूस के साथ बढ़ते रक्षा और कूटनीतिक संबंधों को लेकर सतर्क रहा है।

अन्य देशों की भागीदारी
इस अभ्यास में भारत के अलावा ईरान, बांग्लादेश, बुर्किना फासो, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, माली, नाइजर और ताजिकिस्तान ने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। चीन, कंबोडिया, क्यूबा, कज़ाखस्तान, मंगोलिया, म्यांमार, निरागुआ, नॉर्थ कोरिया, पाकिस्तान, सर्बिया, थाईलैंड, यूएई, उज़्बेकिस्तान जैसे देश पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल हुए। अमेरिकी सैन्य दल भी पहली बार इस अभ्यास को देखने के लिए निमंत्रित किया गया था।
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