
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: उद्योग किसी भी परिणाम के लिए तैयार, CII अध्यक्ष ने क्षेत्रीय जोखिमों को रेखांकित किया, सरकार के रुख का समर्थन किया
नई दिल्ली, 6 जुलाई 2025:
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के अध्यक्ष राजीव मेमानी ने कहा है कि भारतीय उद्योग भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (FTA) के किसी भी परिणाम के लिए तैयार है। उन्होंने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उद्योग राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा और सरकार के रुख का पूर्ण समर्थन करता है।
व्यापार समझौते की स्थिति

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, लेकिन 9 जुलाई को अमेरिका द्वारा लगाए गए 26% अतिरिक्त आयात शुल्क की निलंबन अवधि समाप्त होने के साथ ही अनिश्चितता बढ़ गई है। मेमानी ने कहा, “व्यापार समझौते दोतरफा होते हैं। कुछ क्षेत्रों के लिए यह फायदेमंद होगा, जबकि कुछ क्षेत्रों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि समझौता नहीं होता है, तो इसका असर दोनों देशों पर पड़ेगा, लेकिन भारत राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा।
क्षेत्रीय जोखिम और अवसर
CII अध्यक्ष ने कुछ क्षेत्रों, जैसे कि सूचना प्रौद्योगिकी (IT), फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोटिव, पर समझौते के संभावित प्रभाव को रेखांकित किया। एक अनुकूल समझौता इन क्षेत्रों में सकारात्मक भावनाओं को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन यदि समझौता नहीं होता है, तो ऑटोमोटिव और गारमेंट उद्योगों पर असर पड़ सकता है। मेमानी ने कहा, “हमें अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने की जरूरत है, चाहे समझौता हो या न हो।”
कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भारत ने सख्त रुख अपनाया है। मेमानी ने बताया कि इन क्षेत्रों को शुरुआती समझौते से बाहर रखा जा सकता है, क्योंकि ये क्षेत्र 80 मिलियन से अधिक छोटे किसानों को रोजगार प्रदान करते हैं और इनमें धार्मिक संवेदनशीलताएं भी शामिल हैं।
सरकार का दृष्टिकोण
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी समय सीमा के दबाव में समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है। हम केवल तभी समझौता करेंगे जब यह भारत और अमेरिका दोनों के हित में हो।” गोयल ने यह भी जोर दिया कि भारत किसानों और डेयरी क्षेत्र के हितों की रक्षा करेगा।
उद्योग की तैयारी और सुझाव
CII ने सरकार से व्यापार समझौतों का लाभ उठाने और विनिर्माण क्षेत्र में सुधारों को तेज करने का आग्रह किया है। मेमानी ने कहा कि भारत को अगली पीढ़ी के सुधारों, कारोबारी सुगमता और मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का उपयोग करके अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना चाहिए। CII ने जीएसटी दरों को सरल बनाने, पेट्रोलियम और बिजली जैसे क्षेत्रों को जीएसटी के दायरे में लाने और सीमा शुल्क सुधारों के लिए तीन-स्तरीय संरचना की सिफारिश की है।
आर्थिक प्रभाव
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के अनुसार, एक व्यापक व्यापार समझौता भारत के निर्यात और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा दे सकता है, जिससे अगले दशक में अमेरिका को निर्यात दोगुना हो सकता है और जीडीपी में 0.6% की वृद्धि हो सकती है। विशेष रूप से टेक्सटाइल और हल्के विनिर्माण क्षेत्रों में लाभ होने की उम्मीद है।
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