
भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत को बीजेपी का कारण बताओ नोटिस, पार्टी से निष्कासन की चेतावनी
रायपुर: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। पार्टी संगठन ने उन पर सोशल मीडिया के जरिए पार्टी नेताओं के खिलाफ दुष्प्रचार और अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बीजेपी के प्रदेश महामंत्री जगदीश रोहरा द्वारा जारी इस नोटिस में रवि भगत को सात दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा उनकी प्राथमिक सदस्यता रद्द की जा सकती है।
डीएमएफ फंड पर वीडियो बना विवाद का कारण
जानकारी के अनुसार, रवि भगत ने हाल ही में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड के दुरुपयोग को लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इस वीडियो में उन्होंने पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर गंभीर सवाल उठाए, जिसके बाद यह वीडियो वायरल हो गया। पार्टी नेतृत्व ने इसे संगठनात्मक मर्यादाओं का उल्लंघन माना और इसे अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की। बीजेपी का कहना है कि सोशल मीडिया का इस तरह दुरुपयोग पार्टी की नीतियों और अनुशासन के खिलाफ है।
सात दिन में जवाब नहीं तो निष्कासन की चेतावनी
प्रदेश महामंत्री जगदीश रोहरा द्वारा जारी नोटिस में रवि भगत से स्पष्ट जवाब मांगा गया है। नोटिस में कहा गया है कि यदि सात दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो उनकी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समाप्त की जा सकती है।

पार्टी संगठन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और इसे अनुशासन की कसौटी पर बड़ा कदम माना जा रहा है। बीजेपी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि संगठन के खिलाफ इस तरह की गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
रवि भगत की चुप्पी, बढ़ा सस्पेंस
इस पूरे प्रकरण में रवि भगत की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनकी चुप्पी ने पार्टी के भीतर और बाहर सस्पेंस को और बढ़ा दिया है। रवि भगत का जवाब और पार्टी का अगला कदम उनके राजनीतिक भविष्य को तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। पार्टी के भीतर इसे अनुशासन और संगठनात्मक एकजुटता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पार्टी में नाराजगी का माहौल
रवि भगत के वीडियो के बाद बीजेपी के कई नेताओं में नाराजगी देखी जा रही है। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इस तरह के कदम से न केवल पार्टी की छवि प्रभावित होती है, बल्कि संगठन की एकता और अनुशासन पर भी सवाल उठते हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि रवि भगत को अपनी बात संगठन के मंच पर रखनी चाहिए थी, न कि सोशल मीडिया के जरिए।
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