
Bilaspur: अविवाहित बेटियों के भरण-पोषण और शादी का खर्च उठाना पिता का पवित्र कर्तव्य — High Court
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाते हुए कहा है कि कोई भी पिता अपनी अविवाहित बेटी के भरण-पोषण, शिक्षा और विवाह के खर्च से पीछे नहीं हट सकता। जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि बेटी की देखभाल करना पिता की कानूनी, नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है।
पिता का कर्तव्य: पालन-पोषण से लेकर विवाह तक
कोर्ट ने कहा कि हिंदू परिवार व्यवस्था में कन्यादान को पवित्र कर्तव्य माना गया है, और पिता की यह जिम्मेदारी है कि वह बेटी की शिक्षा, देखभाल और शादी की तैयारी में अपनी भूमिका निभाए। खंडपीठ ने कहा कि इन जिम्मेदारियों से बचने की किसी भी कोशिश को कानून स्वीकार नहीं करता।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख सख्त
हाईकोर्ट एक ऐसे मामले पर सुनवाई कर रहा था जिसमें एक पिता ने अपनी अविवाहित बेटी की जरूरतों और शादी से जुड़े खर्चों से पल्ला झाड़ने की कोशिश की थी। कोर्ट ने इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के प्रति दायित्व निभाने के लिए बाध्य हैं, विशेषकर तब जब बेटी विवाह योग्य आयु में हो और आर्थिक रूप से निर्भर हो।
कानूनी और नैतिक रूप से बाध्य पिता
अपने फैसले में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में भी पिता पर अविवाहित बेटी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी तय की गई है। अदालत ने कहा कि बेटी की जरूरतों को अनदेखा करना या आर्थिक जिम्मेदारी से भागना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।
👉 हमारे WhatsApp channel से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👇👇
https://whatsapp.com/channel/0029VbALQC677qVNwdR5Le3V



