
Bastar में महिला गांजा तस्करों की बढ़ती भूमिका और पुलिस की चुनौतियां
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में गांजा तस्करी के नए ट्रेंड ने पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब नशे की तस्करी में पुरुषों के साथ महिलाओं की भी सहभागिता देखने को मिल रही है। बीते वर्षों में पुलिस ने कई बार महिलाओं को गांजा तस्करी के अपराध में गिरफ्तार किया है।

पिछले वर्ष मात्र तीन महीनों के भीतर बस्तर पुलिस ने 13 महिलाओं को अलग-अलग इलाकों से कुल 100 किलोग्राम से अधिक गांजा के साथ गिरफ्तार किया। बरामद गांजा की कीमत 10 लाख रुपये से अधिक बताई गई है। जिन जगहों पर महिलाएं तस्करी करती पाई गईं, उनमें रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड जैसे व्यस्त स्थान प्रमुख हैं, जहां नजर रखना मुश्किल होता है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पुरुष तस्करों की बढ़ती गिरफ्तारी के बाद अब तस्कर गिरोह महिलाओं को मोहरा बनाने लगे हैं ताकि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से पुलिस को चकमा दिया जा सके। कई महिलाएं परिवार के दबाव या बेरोजगारी के कारण इस कुख्यात व्यापार में शामिल हो रही हैं। जांच में यह भी पता चला है कि महिलाएं गांजा तस्करी के लिए बच्चों के सामान, बैग, हैंडबैग या यहां तक कि अंतर्वस्त्रों में भी नशा छिपा कर लेकर जाती हैं।
आयु में 30 से 50 वर्ष की महिलाओं की गिरफ्तारी आम बात हो गई है। शिकायतों में कभी-कभी बच्चों के साथ महिलाएं भी इस अपराध में पकड़ी जाती हैं, जिससे परिवारों और समाज के लिए नए संकट खड़े हो रहे हैं।
जिलेवार गांजा तस्करी के आंकड़े:
- बस्तर: 246 प्रकरण, 432 आरोपी, 11,181 किलो गांजा जप्त
- सुकमा: 106 प्रकरण, 166 आरोपी, 5052 किलो गांजा जप्त
- कोंडागांव: 78 प्रकरण, 117 आरोपी, 4903 किलो गांजा जप्त
- कांकेर: 43 प्रकरण, 65 आरोपी, 1069 किलो गांजा जप्त
- दंतेवाड़ा: 11 प्रकरण, 13 आरोपी, 349 किलो गांजा जप्त
- नारायणपुर: 1 प्रकरण, 3 आरोपी, 605 किलो गांजा जप्त

पुलिस की चुनौतियां और सामाजिक प्रभाव
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के कारण ट्विटर की जांच और तलाशी में महिला पुलिस कर्मियों की आवश्यकता बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला तस्करों से पूछताछ करना सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील होता जा रहा है।
नशे और तस्करी में महिलाओं की हिस्सेदारी सामाजिक ढांचे पर गहरा प्रभाव डाल रही है। इससे पारिवारिक टूट-फूट, बच्चों की सही देखभाल में कमी, और महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे तेज हो गए हैं। युवाओं के बीच नशे की लत और अपराध प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलने की भी चिंता बढ़ रही है।
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