
Bastar का Dantewada बाढ़ से तबाह : बालपेट और भैरमबंद गांव में टूटी दीवारें, गिरी छतें और उजड़े घर
बाढ़ से तबाही का मंजर
दंतेवाड़ा। बस्तर संभाग का दंतेवाड़ा जिला हाल ही में आई भीषण बाढ़ की मार से अब तक उबर नहीं पाया है। पानी ने गांवों और खेतों को डुबो दिया, पुल बह गए और सालों की मेहनत से बनाए घर पलभर में ढह गए। जहां कभी हरियाली और फसलें थीं, वहां अब सिर्फ रेत और मलबा नजर आता है।

बालपेट गांव में 174 घर जमींदोज
जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर दूर बालपेट गांव की आबादी करीब 1700 है। यहां बाढ़ से 174 घर पूरी तरह ढह गए। गांव में हर तरफ टूटी दीवारें और ढही हुई छतें ही नजर आती हैं। मलबे में अपने बिखरे जीवन की तलाश में ग्रामीण दिन-रात जुटे हुए हैं।

पीढ़ियों की मेहनत बह गई
कुंती नाग जैसे कई ग्रामीण अपने ढहे हुए घरों से मिट्टी हटाकर सामान ढूंढ रहे हैं। उनका कहना है – “ये घर सास-ससुर ने बनाया था। सबकुछ बाढ़ में बह गया, यहां तक कि घर में रखे पैसे और जेवर भी।” कुंती फिलहाल पंचायत भवन के पास बने शेड में रह रही हैं और स्कूल से मिलने वाले भोजन पर गुजारा कर रही हैं।

गुस्सा और असुरक्षा की भावना
फूलमती बीना, जिनका घर भी बाढ़ में बह गया, कहती हैं – “देख रहे हो… सबकुछ खत्म हो गया। फसलें बर्बाद हो गईं। सरपंच कह रहे हैं मुआवजा मिलेगा, लेकिन कब और कितना, ये कोई नहीं जानता।”
ग्रामीणों का डर और गहरा है क्योंकि बाढ़ ने गांव में नया रास्ता बना लिया है। लोगों का कहना है कि अगली बार पानी आया तो फिर से सबकुछ बह जाएगा।
स्कूल में शरण ले रहे परिवार
लक्ष्मी नाग बताती हैं कि कई परिवार अब अपने घरों में सोने से डरते हैं। “गांव का पूरा इलाका डूब गया था। कई घर पूरी तरह गिर चुके हैं। लोग रात को हाईस्कूल में जाकर सोते हैं ताकि सुरक्षित रह सकें।”
मुआवजा बनाम नुकसान
हरेन्द्र नाग का घर पूरी तरह से ढह गया। वे बताते हैं – “सरकार से 1 लाख 20 हजार रुपए का मुआवजा मिला है। लेकिन नुकसान करीब 4 लाख का हुआ है। इतने में दोबारा घर कैसे बनेगा?”
इसी तरह अन्य ग्रामीणों का कहना है कि सरकार से मिली सहायता उनके वास्तविक नुकसान के मुकाबले बहुत कम है।
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