
बांग्लादेशी घुसपैठ: 8 साल की उम्र में आया अब्दुल्लाह, एमपी पुलिस ने किया गिरफ्तार
20 जुलाई 2025
चौंकाने वाला खुलासा
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पुलिस ने एक हैरान करने वाले मामले में बांग्लादेशी नागरिक अब्दुल कलाम को गिरफ्तार किया है। अब्दुल, जो पिछले 8 सालों से ‘नेहा किन्नर’ के नाम से किन्नर समुदाय में सक्रिय था, 8 साल की उम्र में बांग्लादेश से भारत आया था। पुलिस की जांच में पता चला कि उसने फर्जी दस्तावेजों के सहारे अपनी पहचान छिपाकर भारत में रह रहा था।
फर्जी दस्तावेजों का खेल
पुलिस को जांच में पता चला कि अब्दुल ने स्थानीय एजेंटों की मदद से आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड और पासपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज फर्जी तरीके से बनवाए थे। इन दस्तावेजों के आधार पर वह न केवल भारत में रहा, बल्कि कई बार बांग्लादेश की यात्रा भी कर चुका था। भोपाल के तलैया थाना क्षेत्र में उसे सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात गिरफ्तार किया गया।
किन्नर समुदाय में छिपी पहचान
अब्दुल पिछले 8 सालों से भोपाल के मंगलवारा और बुधवारा इलाकों में ‘नेहा’ के रूप में किन्नर समुदाय का हिस्सा बनकर रह रहा था। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या वह वास्तव में ट्रांसजेंडर है या उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए यह रूप अपनाया था। इसके लिए पुलिस उसका जेंडर वेरिफिकेशन टेस्ट कराने की तैयारी में है।
खुफिया जानकारी और गिरफ्तारी
भोपाल पुलिस को इंटेलिजेंस और खुफिया सूत्रों से अब्दुल के अवैध रूप से भारत में रहने की जानकारी मिली थी। इसके आधार पर तलैया थाना पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। वह पिछले एक हफ्ते से पुलिस हिरासत में है और उससे पूछताछ की जा रही है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) भी इस मामले की जांच में शामिल हो गए हैं।
आपराधिक पृष्ठभूमि और पुराने मामले
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब्दुल की आपराधिक पृष्ठभूमि भी सामने आई है। वर्ष 2019 में भोपाल के एमपी नगर थाने में उसके खिलाफ एक मामला दर्ज हुआ था, जिसमें किन्नर काजल बंबइया के साथ उसका विवाद हुआ था। इस मामले में कोर्ट में सुनवाई चल रही है, और अगली पेशी 21 जुलाई को निर्धारित है। इस कारण उसे तत्काल डिपोर्ट नहीं किया जा सकता।
डिपोर्टेशन की प्रक्रिया
पुलिस ने अब्दुल को 30 दिन की हिरासत में रखा है और उसके खिलाफ निर्वासन डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेज बनवाने में किन लोगों ने उसकी मदद की और क्या कोई बड़ा नेटवर्क इसमें शामिल है। पुलिस उसके मोबाइल फोन, कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया चैट्स की भी जांच कर रही है ताकि उसके संपर्कों का पता लगाया जा सके।
सुरक्षा पर सवाल
इस मामले ने मध्य प्रदेश में अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के मुद्दे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने इस मामले को जांच एजेंसियों की नाकामी करार देते हुए बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की जानकारी तुरंत साझा करें ताकि ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।
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