
BALOD में डायरिया का बढ़ता खतरा, 2500 मामले सामने आने के बाद भी नालियों की सफाई ठप
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में डायरिया का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस साल अब तक जिले में 2500 से भी अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। हालात इतने गंभीर होने के बावजूद नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही उजागर हो रही है। शहर के 20 वार्डों में जलभराव और नालियों में गंदगी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। समय पर सफाई और पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने से संक्रमण का खतरा और बढ़ गया है।

नालियां गंदगी से पटी, संक्रमण का डर
शहर की बड़ी और छोटी नालियां लंबे समय से गंदगी से भरी पड़ी हैं। बीते दिनों कुछ वार्डों में नलों से गंदा पानी आने की शिकायत भी सामने आई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में डायरिया जैसी बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं। नगर पालिका ने अब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
गांवों में भी फैला डायरिया
जिले के ग्रामीण इलाकों में भी हालात चिंताजनक हैं। ग्राम तरौद और रानीतराई में डायरिया फैलने से कई लोग बीमार हो गए थे। स्वास्थ्य विभाग ने वहां तैनात टीमों को भेजकर अस्थायी स्वास्थ्य शिविर लगाए और मरीजों का इलाज किया। विभाग ने दूषित पानी और भोजन से बचाव को लेकर ग्रामीणों को अलर्ट जारी किया है।

पाइपलाइन से पहुंच रहा गंदा पानी
कई गांवों में पानी की सप्लाई पाइपलाइन से होती है। समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब पाइपलाइन फट जाती है और समय पर मरम्मत नहीं होती। ऐसे में गंदा पानी नलों से घरों तक पहुंच रहा है, जिससे बीमारियां फैल रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में डायरिया के मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध हैं। विभाग ने लोगों से अपील की है कि डायरिया के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज कराएं।
प्रशासन का दावा बनाम हकीकत
नगर पालिका का कहना है कि जलभराव की जानकारी मंगाई गई है और समय-समय पर नालियों की सफाई की जा रही है। साथ ही दवाई का छिड़काव भी किया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था बिल्कुल ठप पड़ी हुई है।
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