
बालोद में भारी बारिश का कहर: गांवों का संपर्क टूटा, स्कूलों-खेतों में जलभराव
पानी-पानी हुआ बालोद जिला
पिछले 3 दिनों से लगातार हो रही तेज बारिश ने बालोद जिले को जलमग्न कर दिया है। नदी-नाले उफान पर हैं, और कई स्थानों पर पुलिया के ऊपर पानी बहने से आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। जिला मुख्यालय और ब्लॉक से गांवों का संपर्क टूट गया है। शहर के बस स्टैंड, कुछ स्कूलों और खेत-खलिहानों में पानी भर गया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
पुल धंसने से आवागमन ठप
बालोद जिले में लगातार हो रही तेज बारिश ने भारी तबाही मचाई है। जिले में एक प्रमुख पुल के धंसने की खबर सामने आई है, जिसके कारण ब्लॉक मुख्यालय से लगभग एक दर्जन गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। पुल धंसने की सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे रास्ते को ब्लॉक कर दिया और पुल को बंद कर दिया गया है।

मौसम विभाग का आंकड़ा: बालोद में सबसे ज्यादा बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार को जिले में औसत 61.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। बालोद तहसील में सर्वाधिक 119.6 मिमी बारिश हुई, जबकि गुरुर में 43.4 मिमी, गुंडरदेही में 47.9 मिमी, डौंडीलोहारा में 17.2 मिमी, अर्जुदा में 69.3 मिमी और मारी बंगला देवरी में 69 मिमी बारिश दर्ज की गई। जिला प्रशासन की आपदा नियंत्रण टीम प्रभावित क्षेत्रों का जायजा ले रही है और जलभराव वाले इलाकों में पानी निकासी की व्यवस्था की जा रही है।
सेमरिया-बोरी और तुमड़ीकसा नाले में बाढ़
जिले के सेमरिया-बोरी और डौंडीलोहारा के तुमड़ीकसा नाले में जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति बन गई है। सेमरिया-बोरी नाले की बाढ़ से एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। तुमड़ीकसा गांव में भी नाले के उफान के कारण आवागमन बंद हो गया है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में जलभराव
बालोद ब्लॉक के ग्राम लोंडी और खैरवाही के स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों में पानी भर गया है। इससे स्कूली बच्चों और आंगनबाड़ी में आने वाले बच्चों को काफी दिक्कतें हो रही हैं। लोंडी में जलभराव की स्थिति को देखते हुए कई पालकों ने अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र भेजना बंद कर दिया है।
किसानों को भारी नुकसान
वर्तमान में कई किसान धान की नर्सरी तैयार कर खेतों में रोपाई कर रहे थे, लेकिन तेज बारिश और बाढ़ के कारण रोपे गए धान के पौधे बह गए। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भरने से फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।
प्रशासन का प्रयास
जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नजर रखी हुई है और हालात को नियंत्रित करने के लिए पानी निकासी की व्यवस्था की जा रही है। आपदा नियंत्रण टीम प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रही है ताकि स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके।
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