
Balod जिले में बाल विवाह मुक्त जिला बनने की ऐतिहासिक उपलब्धि
छत्तीसगढ़ का एक और गौरवशाली पल
दिनांक 2 अक्टूबर 2025 को छत्तीसगढ़ के बालोद जिले ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। इस जिले को देश का पहला बाल विवाह मुक्त जिला घोषित किया गया है। यह उपलब्धि केवल एक प्रशासनिक प्रयास का परिणाम नहीं, बल्कि समुदाय की एकजुटता, जागरूकता और सामाजिक सुधारों के सार्थक प्रयासों का प्रतीक है। बालोद जिला प्रशासन ने इस दिशा में कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ काम किया, जिसके फलस्वरूप यह सम्मान प्राप्त हुआ।

बाल विवाह पर प्रभावी नियंत्रण
बालोद जिले में वर्ष 2023 से शुरू किए गए विशेष अभियान और जागरूकता कार्यक्रमों के परिणामस्वरूप अब तक के सभी ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में बाल विवाह पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो गया है। जिला प्रशासन के अनुसार, पिछले दो वर्षों में कोई भी बाल विवाह का प्रकरण सामने नहीं आया है। यह उपलब्धि तभी संभव हो सकी, जब जिले के हर स्तर पर इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया और समुदाय के सहयोग से इसे लागू किया गया।
कलेक्टर उमेश मिश्रा का महत्वपूर्ण योगदान
इस ऐतिहासिक उपलब्धि में कलेक्टर उमेश मिश्रा का कुशल मार्गदर्शन और जिला प्रशासन का समन्वित प्रयास सराहनीय रहा। उनके नेतृत्व में जिला प्रशासन ने ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों के साथ मिलकर बाल विवाह मुक्त जिले के निर्माण के लिए ठोस कदम उठाए। विशेष रूप से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए गए, जिसमें स्थानीय नेताओं, शिक्षकों, और स्वयंसेवी संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही।

जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता
बालोद जिले में इस उपलब्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण जागरूकता अभियान और समुदाय की भागीदारी रही। जिला प्रशासन ने स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, और ग्राम सभाओं के माध्यम से माता-पिता को बाल विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराया। इसके साथ ही, बालिकाओं को शिक्षित करने और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। नाबालिग लड़कियों की शादी को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर निगरानी समितियों का गठन भी किया गया, जिसने इस प्रयास को और मजबूत किया।
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