
Raipur कोर्ट ने नवजात को चुराने वाली मां-बेटी को 10 साल की सजा सुनाई
रायपुर: आंबेडकर अस्पताल से नवजात चोरी का गंभीर मामला
छत्तीसगढ़ के रायपुर में — लगभग 10 महीने पहले — आंबेडकर अस्पताल से एक नवजात बच्ची के चोरी (अपहरण) के मामले में, अदालत ने दो महिलाओं को आजीवन नहीं लेकिन 10-10 साल की सज़ा सुनाई है।
आरोपी कौन हैं — पहचान और गिरफ्तारी
अदालत ने आरोपियों — रानी साहू और उसकी बेटी पायल — की पहचान अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की मदद से की।
पुलिस को सूचना मिलते ही मामला गंभीरता से लिया गया। दोनों को तब गिरफ्तार कर लिया गया जब वे “बिलासपुर” के लिए ट्रेन पकड़ने ही वाले थे।

चोरी की तैयारियाँ और मकसद — बिकवाली की योजना
जांच में यह सामने आया कि आरोपी महिलाएं इस नवजात बच्ची को किसी दंपत्ति को बेचने की नियत से hospital से लेकर बाहर ले जाने वाली थीं। इस व्यवहार को देखकर पुलिस मामले में तेजी से आगे बढ़ी।
बताया गया कि रानी साहू पहले भी अपनी एक बेटी को बेच चुकी थी — और पैसों के लालच में इस बार भी ऐसा ही एक कृत्य करने की कोशिश हुई थी। अदालत ने इस लालच और जानबूझकर की गई चोरी को देखते हुए सज़ा सुनाई है।
न्यायालय का फैसला — कठोर सज़ा और मैसेज
अपर सत्र न्यायाधीश बृजेश राय की अदालत ने रानी साहू व पायल को 10-10 साल की सज़ा सुनाई। वहीं, मामले में नामजद युवक को बरी कर दिया गया।
यह फैसला यह संदेश देने की कोशिश है कि नवजात या बच्चों के साथ जुड़े अपराध — चाहे चोरी हो, बेचने की कोशिश हो या अन्य — समाज और कानून दोनों इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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