
Chhattisgarh : ATR में बाघ की मौत, प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप
छत्तीसगढ़ के अचनाकमार टाइगर रिजर्व (ATR) से एक चिंताजनक मामला सामने आया है। सारसडोल गांव के समीप जंगल क्षेत्र में एक नर बाघ का शव मिलने से वन विभाग और एटीआर प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

घायल बाघों की तलाश के दौरान मिला शव
जानकारी के अनुसार, यह शव उस टीम को मिला जिसे दो घायल बाघों की तलाश की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बाघ का शव जंगल में सड़ी-गली अवस्था में पाया गया, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि उसकी मौत कई दिन पहले हो चुकी थी।
गर्दन पर मिले चार दांतों के निशान
प्रारंभिक जांच में बाघ की गर्दन पर चार दांतों के स्पष्ट निशान पाए गए हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि बाघ की मौत आपसी संघर्ष या किसी अन्य बाघ के हमले में हुई हो सकती है। हालांकि, वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
ट्रैप कैमरे में घायल अवस्था में दिखे थे बाघ
वन विभाग के मुताबिक, पिछले 8 दिनों से दो बाघ ट्रैप कैमरों में घायल हालत में दिखाई दे रहे थे। इसके बाद से उनकी लगातार तलाश की जा रही थी, लेकिन अब तक दोनों घायल बाघों का कोई सुराग नहीं मिल सका है।

एटीआर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
बाघ की मौत के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि जब बाघ घायल अवस्था में नजर आ रहे थे, तो समय रहते उनकी निगरानी और उपचार क्यों नहीं किया गया। शव के पूरी तरह सड़ जाने से यह भी स्पष्ट होता है कि मैदान स्तर पर निगरानी में भारी चूक हुई है।
दो बाघ अब भी लापता
फिलहाल, दो घायल बाघ अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। जंगल में तैनात टीमों को अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई है। यह स्थिति न केवल वन्यजीव सुरक्षा बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।
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