
असम में तलाक का अनोखा जश्न: 40 लीटर दूध से नहाया शख्स
14 जुलाई , 25
असम के नलबाड़ी जिले से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी से तलाक मिलने की खुशी में 40 लीटर दूध से स्नान करके जश्न मनाया। इस अनोखे उत्सव का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने लोगों का ध्यान खींचा है। व्यक्ति की इस हरकत ने न केवल स्थानीय लोगों को चौंकाया, बल्कि सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।
माणिक अली ने मनाई ‘आजादी’ की खुशी
इस घटना के केंद्र में हैं नलबाड़ी जिले के बरलियापार गांव के निवासी माणिक अली। वायरल वीडियो में माणिक अपने घर के बाहर एक प्लास्टिक शीट पर खड़े नजर आते हैं, जहां चार बाल्टियों में लगभग 40 लीटर दूध रखा हुआ है। वह एक-एक कर बाल्टियों से दूध अपने ऊपर उड़ेलते हैं और जोश के साथ कहते हैं, “आज से मैं आजाद हूं!” माणिक ने बताया कि उनके वकील ने उन्हें सूचित किया था कि तलाक की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसके बाद उन्होंने इस अनोखे तरीके से अपनी ‘आजादी’ का जश्न मनाया।
पत्नी की बेवफाई से था दुखी
माणिक अली ने वीडियो में अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उनकी पत्नी पहले कम से कम दो बार अपने प्रेमी के साथ भाग चुकी थी। उन्होंने परिवार और समाज की शांति बनाए रखने के लिए हर बार चुप्पी साधी, लेकिन बार-बार विश्वास टूटने के बाद उन्होंने तलाक का फैसला लिया। स्थानीय लोगों ने भी पुष्टि की कि माणिक की पत्नी एक बार अपनी बेटी को भी साथ ले गई थी, जिसने माणिक को भावनात्मक रूप से तोड़ दिया। आखिरकार, दोनों ने आपसी सहमति से कानूनी रूप से अलग होने का निर्णय लिया।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
माणिक अली का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तीन मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है। कुछ लोगों ने इसे ‘स्वतंत्रता की घोषणा’ के रूप में सराहा और माणिक को बधाई दी, जबकि कुछ ने इसे दूध की बर्बादी और ध्यान खींचने वाला स्टंट करार दिया। एक यूजर ने लिखा, “अच्छा फैसला,” जबकि दूसरे ने कहा, “ईश्वर आपको अब अनंत खुशियां प्रदान करें।” वहीं, कुछ यूजर्स ने दूध की बर्बादी पर नाराजगी जताई। यह घटना समाज में तलाक को लेकर बदलते नजरिए को भी दर्शाती है, जहां कुछ लोग इसे नई शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।

दूध से स्नान: प्रतीकात्मक संकेत या विवाद?
माणिक का दूध से स्नान करना केवल एक उत्सव ही नहीं, बल्कि उनके लिए आत्मशुद्धि और भावनात्मक मुक्ति का प्रतीक भी था। कुछ लोगों ने इसे प्राचीन परंपराओं से जोड़ा, जहां दूध से स्नान को सुंदरता और शुद्धता के लिए इस्तेमाल किया जाता था, जैसे कि मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा के समय में। हालांकि, दूध से स्नान को पर्यावरण की दृष्टि से गैर-जिम्मेदाराना माना गया, क्योंकि डेयरी उद्योग में संसाधनों का भारी उपयोग होता है। भारत में एक लीटर दूध की कीमत 50-70 रुपये के बीच होती है, जिससे 40 लीटर दूध की लागत काफी अधिक बैठती है।
तलाक की कानूनी प्रक्रिया
माणिक और उनकी पत्नी ने आपसी सहमति से तलाक लिया, जो हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13B के तहत मान्य है। इस प्रक्रिया में दोनों पक्षों को संयुक्त रूप से याचिका दायर करनी होती है, और छह महीने की प्रतीक्षा अवधि के बाद तलाक को अंतिम रूप दिया जाता है। इस दौरान बच्चों की कस्टडी और संपत्ति के बंटवारे जैसे मुद्दों को भी सुलझाया जाता है। माणिक के मामले में, उनकी बेटी की कस्टडी का जिक्र नहीं मिला, लेकिन स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पत्नी ने बेटी को अपने साथ ले लिया था।
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