March 7, 2026
हवाई किराए में भारी बढ़ोतरी को ‘शोषण’ बताया, Supreme Court ने कहा- अब हम दखल देंगे

हवाई किराए में भारी बढ़ोतरी को ‘शोषण’ बताया, Supreme Court ने कहा- अब हम दखल देंगे

Jan 20, 2026

त्योहारों के दौरान यात्रियों का शोषण बर्दाश्त नहीं, केंद्र और DGCA को जवाब दाखिल करने का निर्देश
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों के दौरान हवाई किरायों में हुई भारी बढ़ोतरी को “शोषण” करार देते हुए साफ कहा है कि वह एयरलाइन टिकट की कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए दखल देगा। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सोमवार को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

 

कोर्ट ने कहा- कुंभ और त्योहारों में देखा जा रहा शोषण
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक से कहा,

“हम निश्चित रूप से दखल देंगे। कुंभ और अन्य त्योहारों के दौरान यात्रियों का शोषण देखिए। दिल्ली से प्रयागराज और जोधपुर के किराए देख लीजिए।”
जस्टिस संदीप मेहता ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा कि अहमदाबाद के किराए शायद नहीं बढ़े होंगे, लेकिन जोधपुर जैसी जगहों पर किराए में तेजी से इजाफा हुआ है।

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को तय की है। केंद्र ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

याचिका में क्या मांग की गई?
सोशल एक्टिविस्ट एस. लक्ष्मीनारायणन की ओर से दाखिल याचिका में निजी एयरलाइंस द्वारा लगाए जा रहे अनियमित और अत्यधिक हवाई किरायों तथा सहायक शुल्कों पर नियंत्रण के लिए बाइंडिंग रेगुलेटरी गाइडलाइंस बनाने की मांग की गई है।

याचिका में आरोप लगाया गया कि:
इकोनॉमी क्लास में फ्री चेक-इन बैगेज अलाउंस को 25 किलो से घटाकर 15 किलो कर दिया गया, जिससे बेसिक सर्विस भी एक्स्ट्रा रेवेन्यू का जरिया बन गई।
सिर्फ एक पीस चेक-इन बैगेज की अनुमति देने की नीति भेदभावपूर्ण है और यात्रियों को कोई रिबेट या मुआवजा नहीं दिया जाता।

किसी भी अथॉरिटी के पास हवाई किरायों या फीस पर कैप लगाने या रिव्यू करने का अधिकार नहीं है, जिससे एयरलाइंस मनमाने ढंग से छिपे हुए चार्ज लगा सकती हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि त्योहारों, इमरजेंसी या खराब मौसम के दौरान यात्रियों को मजबूरी में हवाई यात्रा करनी पड़ती है, और ऐसे समय में यह मनमाना तरीका नागरिकों के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन है।

पिछले साल भी कोर्ट ने मांगा था जवाब
इससे पहले 17 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इसी याचिका पर केंद्र, DGCA और एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AERA) से जवाब मांगा था। याचिका में सिविल एविएशन सेक्टर में पारदर्शिता और यात्रियों के संरक्षण के लिए एक स्वतंत्र और मजबूत रेगुलेटर बनाने की भी मांग की गई थी।

 

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