
अंधविश्वास ने ली दो लोगों की जान, शबरी नदी में डुबकी के दौरान हादसा
सुकमा में झाड़-फूंक के चक्कर में गई जान
सुकमा, 20 जुलाई 2025: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में अंधविश्वास ने दो लोगों की जिंदगी छीन ली। एक 17 वर्षीय युवती, जो लंबे समय से बीमारी से जूझ रही थी, झाड़-फूंक के लिए सुकमा आई थी। शनिवार को शबरी नदी में डुबकी लगाने के दौरान वह तेज बहाव का शिकार हो गई। उसे बचाने की कोशिश में एक बैगा पुजारी भी नदी की तेज धार में बह गया, और दोनों की मौत हो गई।
नदी में डुबकी बनी मौत का कारण
घटना गोंगला मार्ग पर सीआरपीएफ द्वितीय वाहिनी कैंप से कुछ दूरी पर शबरी नदी में हुई। युवती कई दिनों से बीमार थी और पड़ोसी राज्य में इलाज के बाद भी ठीक नहीं हो रही थी। इसके बाद परिजन उसे सुकमा के सुंदर नगर में झाड़-फूंक के लिए लेकर आए। मृतका के परिजन महेश लेकाम ने बताया कि पांच दिनों तक वड़े गुनिया द्वारा झाड़-फूंक की प्रक्रिया चली। शनिवार को अंतिम पूजा के लिए युवती को शबरी नदी के किनारे ले जाया गया। पूजा के बाद तांत्रिक के कहने पर युवती ने नदी में डुबकी लगाई, लेकिन तेज बहाव के कारण उसका संतुलन बिगड़ गया और वह बह गई।
बचाने की कोशिश में पुजारी भी डूबा
युवती को बचाने के लिए बैगा पुजारी ने भी नदी में छलांग लगाई, लेकिन वह भी तेज धार में बह गया। देखते ही देखते दोनों नदी में डूब गए। घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई, जिसके बाद नगर सेना और गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची।

गोताखोरों ने युवती का शव बरामद कर लिया, जबकि बैगा पुजारी के शव की तलाश जारी है।
पुलिस और प्रशासन ने शुरू की जांच
हादसे के बाद मौके पर थाना प्रभारी, तहसीलदार और अन्य अधिकारी मौजूद थे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह घटना अंधविश्वास के खतरनाक परिणामों को उजागर करती है, जहां इलाज के बजाय झाड़-फूंक पर भरोसा करने से दो लोगों की जान चली गई।
अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता की जरूरत
यह हादसा समाज में अंधविश्वास की गहरी जड़ों को दर्शाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता अभियान और शिक्षा का प्रसार जरूरी है। स्थानीय प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए लोगों से वैज्ञानिक उपचार पर भरोसा करने की अपील की है।
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