
मौत की एंबुलेंस! ऑक्सीजन की कमी से मरीज ने तोड़ा दम, CMHO ने बनाई जांच समिति
गरियाबंद: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिला मुख्यालय स्थित सोमेश्वर हॉस्पिटल में इलाज के दौरान और बाद में रेफर किए जाने पर ऑक्सीजन की कमी से एक मरीज की मौत हो गई। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने चार सदस्यीय विशेषज्ञ जांच समिति का गठन किया है और 36 घंटे के भीतर रिपोर्ट तलब की है।
एंबुलेंस में नहीं थी ऑक्सीजन, रास्ते में तोड़ा दम
मिली जानकारी के अनुसार, मरीज की हालत बिगड़ने पर उसे सोमेश्वर हॉस्पिटल से रेफर किया गया था। आरोप है कि जिस एंबुलेंस से मरीज को भेजा गया, उसमें ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। रास्ते में ऑक्सीजन खत्म होने के कारण मरीज की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।

बिना लाइसेंस के कर रहे थे हड्डी का इलाज
CMHO डॉ. यू.एस. उईके ने मामले में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि सोमेश्वर हॉस्पिटल के पास अस्थि रोग (Orthopedic) के इलाज और जांच का वैध लाइसेंस ही नहीं है। मृतक मरीज की पसली टूटी हुई थी। बिना विशेषज्ञता और लाइसेंस के अस्पताल द्वारा गंभीर मरीज का उपचार किया जाना नियमों का सीधा उल्लंघन है।
आयुष्मान लाइसेंस पहले ही हो चुका है निरस्त
प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया है कि करीब तीन महीने पहले निरीक्षण के दौरान सोमेश्वर हॉस्पिटल मानकों पर खरा नहीं उतरा था। निर्धारित सेटअप और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के चलते आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाला उपचार लाइसेंस पहले ही काटा जा चुका था। अब विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में इस अस्पताल को नर्सिंग होम संचालन की अनुमति दी गई थी। CMHO ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि जांच समिति की रिपोर्ट में अस्पताल की लापरवाही या नियम विरुद्ध कार्य की पुष्टि होती है, तो अस्पताल का नर्सिंग होम लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त कर दिया जाएगा।

जांच समिति में शामिल विशेषज्ञ
- डॉ. हरीश चौहान (सर्जरी विशेषज्ञ)
- डॉ. योगेंद्र कुमार पात्रे (निश्चेतन विशेषज्ञ)
- डॉ. गजेंद्र ध्रुव
- डॉ. सुनील रेड्डी
प्रशासन सख्त, निजी अस्पतालों में हड़कंप
स्वास्थ्य विभाग की इस त्वरित कार्रवाई से जिले के निजी अस्पतालों में हड़कंप मच गया है। 36 घंटे बाद आने वाली रिपोर्ट यह तय करेगी कि सोमेश्वर हॉस्पिटल का भविष्य क्या होगा और मरीज की जान की कीमत कौन चुकाएगा।
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