
Ambikapur: सट्टा गिरोह के सरगना के घर से लाखों की नकदी और जमीनों के दस्तावेज जब्त, जांच तेज
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में ऑनलाइन सट्टा संचालित करने वाले बड़े गिरोह के सरगना आयुष उर्फ दीप सिन्हा के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई ने कई राज्यों में हलचल मचा दी है। पुणे से गिरफ्तार किए गए दीप सिन्हा के घर से पुलिस ने लाखों रुपये नगद, सोने-चांदी के आभूषण, जमीनों के महत्वपूर्ण दस्तावेज और बैंक संबंधी साक्ष्य जब्त किए हैं। पुलिस अब बेनामी संपत्तियों की जांच में जुटी है और अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों को अटैच करने की तैयारी कर रही है।
पुणे से गिरफ्तारी के बाद खुलासे
पुलिस के अनुसार, आयुष उर्फ दीप सिन्हा पिछले करीब डेढ़-दो वर्षों से फरार था। वह छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य राज्यों में भी ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क चला रहा था। अंबिकापुर सीएसपी राहुल बंसल के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और गोपनीय सूचना के आधार पर उसे पुणे से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद दो दिन की पुलिस रिमांड पर कई अहम खुलासे हुए। जांच में पता चला कि दीप सिन्हा ऑनलाइन सट्टे के लिए आईडी उपलब्ध कराता था और उसके नेटवर्क से करीब 300 म्यूल अकाउंट संचालित हो रहे थे, जिनके जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। इन अकाउंट्स का इस्तेमाल रकम घुमाने और पुलिस की नजर से बचने के लिए किया जाता था।

घर की तलाशी में मिले साक्ष्य
रिमांड के दौरान गुरुवार को कोतवाली पुलिस ने दीप सिन्हा को अंबिकापुर के सत्तीपारा इलाके में उसके घर ले जाकर तलाशी ली। घर पर ताला लगा था और कोई परिजन मौजूद नहीं था। पुलिस ने ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया। तलाशी में 6 लाख 45 हजार रुपये नगद, सोने-चांदी के आभूषण, जमीनों से जुड़े कई दस्तावेज, 7 एटीएम कार्ड और एक पासबुक जब्त की गई। पुलिस का मानना है कि गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही परिजनों ने कुछ नकदी और दस्तावेज पहले ही हटा लिए थे, लेकिन बचे साक्ष्य अवैध कमाई की पुष्टि करते हैं।
नेटवर्क में दर्जनभर से अधिक नाम उजागर
पूछताछ में दीप सिन्हा ने अपने सट्टा नेटवर्क में शामिल कई सहयोगियों के नाम बताए। इनमें सुधीर गुप्ता, राहुल अग्रवाल, सोम गुप्ता, अम्मी गिरी, सौरभ यादव, साहिल गुप्ता, अमन करारिया, श्रीकांत अग्रवाल, राहुल कुमार सोनी, अर्जुन गुप्ता, ऋतिक मंदिलवार, नितिन यादव, अमित कुमार मिश्रा, ध्रुविल पटेल, मुकेश त्रिपाठी, सौरभ गुप्ता, अंकित गुप्ता, प्रतिक कश्यप, सत्यम केशरी और सूरज खटीक शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि कुछ के खिलाफ पहले से एफआईआर दर्ज है, जबकि बाकी के खिलाफ साक्ष्य जुटाकर कार्रवाई की जाएगी। कई टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश के लिए तैयार हैं।
बेनामी संपत्तियों और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच
जांच में सामने आया कि दीप सिन्हा ने सट्टे से कमाए करोड़ों रुपये अपने और परिजनों के नाम पर संपत्तियों में निवेश किए हैं। कई संपत्तियां बेनामी होने की आशंका है। पुलिस ने राजस्व विभाग से जमीनों और अचल संपत्तियों का ब्योरा मांगा है। मनी लॉन्ड्रिंग और बेनामी संपत्ति अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की संभावना तलाशी जा रही है। जांच पूरी होने पर अवैध संपत्तियों को अटैच किया जाएगा।
फरारी में मदद करने वालों पर भी शिकंजा
व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल और बैंक लेन-देन के विश्लेषण से पता चला कि फरारी के दौरान संतोष कश्यप और मोंटी सोनी ने मदद की थी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया और अपराध दर्ज किया, हालांकि बाद में मुचलके पर छोड़ दिया गया। दीप सिन्हा को न्यायालय में पेश कर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
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