
Ambikapur: दूध सागर योजना में बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा, महिलाओं ने मवेशी और जमीन बेचकर चुकाया कर्ज
अंबिकापुर, 23 अगस्त 2025 — दूध सागर अंबिकापुर योजना में सामने आए बड़े वित्तीय घोटाले (Big scam) ने महिला स्व-सहायता समूहों को गंभीर संकट में डाल दिया है। इस अनियमितता के कारण समूह की अनेक महिलाओं को दूध की राशि नहीं मिली और उन्हें मवेशियों के लिए आहार तक बाजार से उधार में खरीदना पड़ा। कुछ महिलाओं ने आर्थिक दबाव की वजह से अपने मवेशी बेच दिए, जबकि कुछ को तो अपनी जमीनें बेचकर बाजार का कर्ज चुकाना पड़ा।

जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी का आरोप
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, घोटाले की जांच रिपोर्ट में संलिप्त कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की गई है। जिन खातों में महिलाओं के दूध का भुगतान अवैध तरीके से हुआ, उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है। इससे न्याय और जवाबदेही की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
कानून और नियम क्या कहते हैं?
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमावली और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मुताबिक, वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने पर तत्काल एफआईआर दर्ज कराना अनिवार्य है। यदि जिम्मेदार अधिकारी आदेश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं करते, तो यह कदाचरण और कर्तव्यहीनता की श्रेणी में आता है। ऐसे में विभागीय जांच, निलंबन या सेवा से हटाने जैसी कठोर कार्रवाई संभव है।

दस्तावेजों को लेकर प्रशासनिक पेच
उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं राजेंद्र प्रसाद शुक्ला के अनुसार, संबंधित केस के दस्तावेज थाने और एसपी कार्यालय को सौंपने की कोशिश की गई, लेकिन वे ओरिजनल नहीं थे। इस वजह से एफआईआर अब तक नहीं हो पाई है। शुक्ला का कहना है कि उन्होंने जिला पंचायत सीईओ से मौखिक अनुरोध कर दस्तावेज मांगे, लेकिन अब तक नहीं मिले।

वहीं, जिला पंचायत सरगुजा के सीईओ विनय अग्रवाल का कहना है कि उनसे न तो कोई पत्राचार हुआ, न ही मौखिक चर्चा की गई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पशुपालन विभाग अधिकारी उनसे आकर आवश्यक दस्तावेज ले सकते हैं और तुरंत एफआईआर की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकते हैं।
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