
इलाहाबाद High Court का महत्वपूर्ण फैसला: नए वकील को NOC के बिना भी जमानत पर बहस का अधिकार
प्रयागराज। Allahabad High Court ने एक अहम आदेश में स्पष्ट किया है कि पूर्व वकील से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेना केवल सदाचार (courtesy) की प्रक्रिया है। कोर्ट ने कहा कि किसी मामले में नया अधिवक्ता बिना NOC के भी जमानत आवेदन पर बहस कर सकता है। यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया और वकालतनामा से जुड़े विवादों पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन देता है।
अदालत ने कहा— NOC अनिवार्य नहीं, मात्र शिष्टाचार
फैसला सुनाते हुए पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति Rajesh Singh Chauhan और न्यायमूर्ति Abdhesh Kumar Chaudhary शामिल थे, ने कहा कि किसी भी मुकदमे में नया वकील चाहे तो बिना NOC पेश किए जमानत पर बहस कर सकता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अदालतें केवल यह देखते हुए बहस का अवसर रोक नहीं सकतीं कि पूर्व वकील से NOC उपलब्ध नहीं है।

मामला क्या था?
एक आरोपी की ओर से नया वकील नियुक्त किया गया था, लेकिन पुराने वकील की ओर से NOC उपलब्ध नहीं कराई गई। इस पर बहस की अनुमति को लेकर आपत्ति उठाई गई थी।
पीठ ने इस आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि कानून में कहीं भी NOC को अनिवार्य नहीं बताया गया है।
अदालत का तर्क— litigant के अधिकार सर्वोपरि
पीठ ने कहा कि—
- किसी भी आरोपी या पक्षकार को पसंद का वकील रखने का मौलिक अधिकार है।
- NOC न होने की वजह से बहस पर रोक लगाना न्याय तक पहुंच के अधिकार को बाधित करेगा।
- NOC केवल एक नैतिक और व्यावहारिक व्यवस्था है, कानूनी आवश्यकता नहीं।
👉 हमारे WhatsApp channel से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👇👇
https://whatsapp.com/channel/0029VbALQC677qVNwdR5Le3V



