
अग्रिम जमानत के लिए पहले सेशन कोर्ट जाएं: Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) को लेकर देशभर के हाई कोर्ट को सख्त और स्पष्ट निर्देश दिए हैं। डिवीजन बेंच ने कहा कि किसी भी आरोपी को अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाई कोर्ट जाने के बजाय पहले संबंधित सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए।
हाई कोर्ट द्वारा एफआईआर रद्द करने से इनकार के बाद सीधे अग्रिम जमानत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि हाई कोर्ट एफआईआर रद्द करने से इंकार करता है, तो उसे उसी याचिका में अग्रिम जमानत देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि क्रिमिनल रिट पिटीशन में प्री-अरेस्ट बेल देना पूरी तरह अनुचित है और यह न्यायिक प्रक्रिया के विरुद्ध है।

मामला: यूपी सरकार के खिलाफ दायर याचिका
उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ संजय कुमार गुप्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने एफआईआर रद्द करने और अग्रिम जमानत दोनों की मांग की थी, जिस पर कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि दोनों प्रक्रियाएं अलग हैं और उन्हें अलग स्तर पर ही सुना जाना चाहिए।
कार्यवाही रद्द करने के अधिकार के दुरुपयोग पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट कार्यवाही रद्द करने वाले अधिकार क्षेत्र (Section 482 CrPC) का दुरुपयोग न करे।
याचिका में यह व्यवस्था स्थापित की गई कि—
- एफआईआर रद्द करना और अग्रिम जमानत देना दो अलग प्रकृति की राहतें हैं।
- एक ही याचिका के माध्यम से दोनों राहतें देना न्यायिक सिद्धांतों के विपरीत है।
- अग्रिम जमानत हमेशा सेशन कोर्ट → फिर हाई कोर्ट → और अंत में सुप्रीम कोर्ट के नियम अनुसार ही दी जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश
अदालत ने कहा कि देशभर के हाई कोर्ट को इस सिद्धांत का पालन करना होगा, ताकि न्यायिक प्रक्रिया सुव्यवस्थित और संतुलित बनी रहे। अग्रिम जमानत के लिए निर्धारित क्रम का पालन करना आवश्यक है और इससे न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहती है।
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