
आदिवासी बच्चों की शिक्षा के नाम पर घोटाला: 3 करोड़ की फाइल गुम, जांच पर जांच
छत्तीसगढ़ में आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए आवंटित धनराशि में बड़े पैमाने पर घोटाले की खबर ने हड़कंप मचा दिया है। आदिवासी विकास विभाग में 3 करोड़ रुपये के कार्य से संबंधित महत्वपूर्ण फाइल के गायब होने से सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन जांच पर जांच का सिलसिला जारी है, और अभी तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। यह घोटाला गरीब आदिवासी बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का गंभीर मामला सामने लाता है।

फाइल गायब, भ्रष्टाचार की आशंका
आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त माया वॉरियर ने 126 छात्रावासों और आश्रमों के नवीनीकरण के लिए 4.95 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया था, जिसमें से 3 करोड़ रुपये का हिस्सा कथित तौर पर गलत तरीके से उपयोग किया गया। इस राशि से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज और फाइलें गायब हो गई हैं, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका और गहरा गई है। सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर ने इस प्रस्ताव पर भुगतान की स्वीकृति दी थी, लेकिन अब फाइल के गायब होने से जवाबदेही का सवाल उठ रहा है।

आदिवासी बच्चों का भविष्य दांव पर
आदिवासी बच्चों की शिक्षा और कल्याण के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा विशेष योजनाएं चलाई जाती हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य आदिवासी समुदाय के बच्चों को शिक्षा और बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है, ताकि वे गरीबी के चक्र से बाहर निकल सकें। लेकिन इस तरह के घोटाले इन बच्चों के भविष्य को खतरे में डाल रहे हैं। जबलपुर में भी एक समान मामला सामने आया, जहां ककरहटा के शासकीय आदिवासी बालक आश्रम में बच्चों की संख्या को लेकर गड़बड़ी पाई गई। जांच में पाया गया कि हॉस्टल में दर्ज 20 बच्चों में से केवल 7-8 ही मौजूद थे, बाकी बच्चे गांव में रह रहे थे, फिर भी उनके नाम पर हजारों रुपये की राशि आवंटित की जा रही थी।
जांच का ढोंग, कार्रवाई का इंतजार
इस घोटाले के सामने आने के बाद आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारियों ने जांच की बात कही है। संभागीय अधिकारी नीलेश रघुवंशी ने कहा कि यदि आरोप सही पाए गए, तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जांच के नाम पर केवल समय बर्बाद किया जा रहा है। कई मामलों में, जैसे अलीराजपुर में 1.27 करोड़ रुपये के वेतन-भत्तों के घोटाले में, अधिकारियों को निलंबित किया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस सजा नहीं हुई है।
सरकार की जवाबदेही पर सवाल
आदिवासी बच्चों के लिए बने आश्रम और छात्रावासों में इस तरह की अनियमितताएं कोई नई बात नहीं हैं। हाल ही में, राजस्थान में 1800 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया, जहां आदिवासी छात्रों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया। इसी तरह, बस्ती में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले में 1.56 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी उजागर हुई। इन घटनाओं से साफ है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद बच्चों तक नहीं पहुंच रहा है।
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