
अब जनरल कैटेगरी में भी कंपीट कर पाएंगे SC-ST-OBC के कैंडिडेट, Supreme Court के ताजा फैसले से क्या बदलेगा
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों और भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि SC, ST, OBC या EWS वर्ग का कोई उम्मीदवार सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे जनरल कैटेगरी की सीटों पर चयनित होने का पूरा हक है। कोर्ट ने ‘डबल बेनिफिट’ की दलील को खारिज करते हुए कहा कि जनरल कैटेगरी किसी विशेष वर्ग के लिए आरक्षित नहीं है, बल्कि यह केवल मेरिट के आधार पर सभी के लिए खुली है।

फैसले की पृष्ठभूमि
यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट की एक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा था, जहां जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क ग्रेड-II के पदों के लिए परीक्षा हुई। भर्ती नियमों में प्रावधान था कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को जनरल कैटेगरी की सीटें नहीं दी जाएंगी, भले ही उनके अंक सामान्य कट-ऑफ से अधिक हों। हाईकोर्ट ने इस नियम को गलत ठहराया और कहा कि मेरिटोरियस आरक्षित उम्मीदवारों को जनरल कैटेगरी में शामिल किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस दीपंकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह शामिल थे, ने 4 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और सभी अपीलें खारिज कर दीं। कोर्ट ने इंद्रा साहनी (1992) जैसे पुराने फैसलों का हवाला देते हुए दोहराया कि ओपन कैटेगरी किसी जाति या वर्ग से बंधी नहीं है।
कोर्ट ने क्या कहा
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:
यदि आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार बिना किसी रियायत (जैसे आयु या फीस में छूट) के जनरल कट-ऑफ से अधिक अंक लाता है, तो उसे शॉर्टलिस्टिंग या इंटरव्यू स्टेज में ही जनरल कैटेगरी में माना जाए।
- ‘डबल बेनिफिट’ का तर्क गलत है, क्योंकि जनरल कैटेगरी मेरिट आधारित है, न कि आरक्षण।
- यदि अंतिम मेरिट में अंक जनरल कट-ऑफ से कम रह जाते हैं, तो उम्मीदवार को अपनी मूल आरक्षित श्रेणी में लाभ मिलेगा।
- कोर्ट ने कहा, “ओपन का मतलब सिर्फ ओपन है। ये सीटें किसी जाति, वर्ग या लिंग के लिए रिजर्व नहीं हैं।”
इस फैसले से क्या बदलेगा
आरक्षित वर्ग के मेधावी उम्मीदवारों के लिए: अब वे जनरल कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा कर बेहतर अवसर पा सकेंगे। इससे उनकी मेरिट को उचित सम्मान मिलेगा।
भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता: सभी भर्ती एजेंसियों (जैसे UPSC, SSC, राज्य PSC) को मेरिट लिस्ट तैयार करते समय आरक्षित उम्मीदवारों को जनरल में शामिल करना होगा।
जनरल कैटेगरी उम्मीदवारों पर असर: कुछ मामलों में जनरल सीटें आरक्षित वर्ग के मेधावियों को मिल सकती हैं, लेकिन कोर्ट ने जोर दिया कि यह समानता के सिद्धांत (अनुच्छेद 14 और 16) के अनुरूप है।
आरक्षण व्यवस्था पर प्रभाव: आरक्षण का उद्देश्य समावेशन है, न कि मेरिटोरियस उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाना। यह फैसला आरक्षण और मेरिट के बीच संतुलन स्थापित करता है।
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