
पत्नी के बेबुनियाद आरोप को हाई कोर्ट ने माना क्रूरता, पति को मिली तलाक की मंजूरी
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक तलाक के मामले में पत्नी द्वारा पति पर लगाए गए नपुंसकता के बेबुनियाद आरोप को मानसिक क्रूरता करार देते हुए पति की याचिका को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को पलटते हुए पति को तलाक की अनुमति दे दी है। यह मामला जांजगीर-चांपा के एक युवक और बलरामपुर की एक युवती के बीच 2013 में हुए विवाह से जुड़ा है, जिसमें वैवाहिक विवाद के कारण दोनों सात साल से अलग-अलग रह रहे थे।
विवाह के बाद शुरू हुआ विवाद
जांजगीर-चांपा के रहने वाले एक शिक्षाकर्मी युवक की शादी 2 जून 2013 को बलरामपुर की एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता युवती से हुई थी। शादी के कुछ महीनों बाद ही पत्नी ने पति पर तबादले का दबाव बनाना शुरू कर दिया। वह चाहती थी कि पति उसकी नौकरी वाली जगह या आसपास तबादला करवाए। जब तबादला नहीं हुआ, तो उसने पति पर नौकरी छोड़ने का दबाव डाला। इस बीच आपसी विवाद और संवादहीनता बढ़ने से 2017 में दोनों अलग-अलग रहने लगे।
पत्नी ने लगाया नपुंसकता का गंभीर आरोप
विवाह के सात साल बाद 2022 में पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान पत्नी ने पति पर यौन संबंध बनाने में अक्षम होने और नपुंसकता का गंभीर आरोप लगाया। हालांकि, उसने कोर्ट में स्वीकार किया कि उसके पास इस आरोप की पुष्टि के लिए कोई मेडिकल रिपोर्ट या वैधानिक दस्तावेज नहीं है। इसके अतिरिक्त, पत्नी ने पहले भी पति पर पड़ोस की महिला के साथ अवैध संबंध का आरोप लगाया था।

फैमिली कोर्ट ने खारिज की थी याचिका
फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक की याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने मामले की गहन सुनवाई की और पत्नी के आरोपों को गंभीरता से लिया।
हाई कोर्ट का कड़ा रुख, माना मानसिक क्रूरता
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बिना किसी मेडिकल प्रमाण के नपुंसकता जैसे गंभीर आरोप लगाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह के आरोप न केवल व्यक्ति के मान-सम्मान को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि उसके मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को त्रुटिपूर्ण करार देते हुए उसे खारिज कर दिया।
तलाक को दी गई मंजूरी
हाई कोर्ट ने पति की याचिका को स्वीकार करते हुए यह माना कि पत्नी के खिलाफ क्रूरता और विवाह विच्छेद के आधार सिद्ध हो गए हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे हालात में वैवाहिक संबंध को बनाए रखना न्याय और कानून के अनुरूप नहीं होगा। इस आधार पर हाई कोर्ट ने पति को तलाक की मंजूरी दे द
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