
NHM संविदा कर्मियों का विधानसभा घेराव, पुलिस के साथ झूमाझटकी; स्वास्थ्य सेवाएं बाधित
रायपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का आंदोलन सातवें दिन भी उग्र रूप लेता दिखा। नवा रायपुर के तूता धरना स्थल से सैकड़ों NHM कर्मचारी, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं, विधानसभा घेराव के लिए रवाना हुए। अपनी मांगों को लेकर आक्रोशित कर्मचारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झूमाझटकी हुई। इस दौरान कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. खेमराज सोनवानी और प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
NHM कर्मियों की हड़ताल के कारण प्रदेशभर में पिछले दो दिनों से स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। कर्मचारियों ने सरकार को अपनी मांगों पर ठोस निर्णय लेने के लिए 15 अगस्त तक का अल्टीमेटम दिया है।

कर्मचारियों की मांगें और आंदोलन
NHM संविदा कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण, वेतन वृद्धि, और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि सरकार संविदा कर्मियों को स्थायी नौकरी दे और उनकी सेवाओं को नियमित कर्मचारियों के समान मान्यता प्रदान करे। आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि वे कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं, लेकिन उनकी मेहनत का उचित सम्मान और आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा।
सातवें दिन के प्रदर्शन में कर्मचारियों ने विधानसभा की ओर कूच किया, लेकिन पुलिस ने नवा रायपुर में बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान कुछ कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
NHM कर्मचारियों की हड़ताल का असर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य ढांचे पर साफ दिख रहा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कई स्वास्थ्य केंद्रों पर ओपीडी सेवाएं, टीकाकरण, और अन्य जरूरी चिकित्सा सुविधाएं ठप पड़ी हैं। मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन को अल्टीमेटम
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी संगठन के नेताओं ने स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. खेमराज सोनवानी और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 15 अगस्त तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। संघ के नेताओं ने कहा, “हमारी मांगें जायज हैं। हम सिर्फ अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। सरकार को हमारी बात सुननी होगी।”
प्रशासन और पुलिस की भूमिका
पुलिस ने प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए नवा रायपुर और विधानसभा के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की। बैरिकेडिंग और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के बावजूद कर्मचारियों का जोश कम नहीं हुआ। प्रशासन ने कर्मचारियों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की है और उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

NHM कर्मचारियों का आंदोलन अब सियासी रंग लेने लगा है। विपक्षी दल इस मुद्दे को उठाकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि वह कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है, लेकिन किसी भी निर्णय के लिए समय चाहिए।
15 अगस्त तक का अल्टीमेटम समाप्त होने के बाद इस आंदोलन का क्या रूप लेगा, यह देखना बाकी है। फिलहाल, कर्मचारियों का गुस्सा और स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका असर छत्तीसगढ़ में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
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