
छत्तीसगढ़ के किसानों को फसल के ज्यादा दाम, विधानसभा में 4 संशोधन विधेयक पारित
विधानसभा में चार महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पारित
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन, 17 जुलाई 2025 को, सदन में चार महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पारित किए गए। इनमें छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक 2025, छत्तीसगढ़ बकाया कर, ब्याज और शास्ति निपटान (संशोधन) विधेयक 2025, छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय स्थापना और संचालन (संशोधन) विधेयक, और मंडी संशोधन विधेयक शामिल हैं। इन विधेयकों के पारित होने से किसानों को उनकी फसलों के लिए बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ी है।
मंडी संशोधन विधेयक पर विपक्ष का विरोध
मंडी संशोधन विधेयक के पेश होने पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया और सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि यह विधेयक केंद्र सरकार के तीन किसान विरोधी कानूनों की तर्ज पर बनाया गया है, जो किसानों के शोषण को बढ़ावा देगा। विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। इस विरोध के चलते विपक्षी सदस्यों ने कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया।
भू-राजस्व संहिता विधेयक से जमीन विवादों में कमी की उम्मीद
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक 2025 को ध्वनिमत से पारित किया गया। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि इस विधेयक से जमीन संबंधी विवादों में कमी आएगी और अवैध प्लाटिंग पर प्रभावी रोक लगेगी। साथ ही, नक्शों के बटांकन और मृत्यु के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को सरल किया जाएगा, जिससे किसानों और उनके आश्रितों को सुविधा होगी।
डीएपी खाद की कमी पर विपक्ष का हंगामा
सदन में डीएपी खाद की कमी का मुद्दा भी गरमाया। विपक्षी विधायक उमेश पटेल ने खाद की कमी और वितरण की समस्याओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने जवाब में कहा कि डीएपी की कमी को पूरा करने के लिए एनपीके, एसएसपी, और नैनो डीएपी का पर्याप्त भंडारण किया गया है। उन्होंने बताया कि 18,850 मीट्रिक टन खाद की आपूर्ति जल्द होगी। हालांकि, विपक्ष ने सरकार पर खाद संकट को लेकर किसानों को परेशान करने का आरोप लगाया।
किसानों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सदन में आश्वासन दिया कि सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि खाद की कमी से निपटने के लिए वैकल्पिक उर्वरकों की व्यवस्था की गई है और किसानों पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। साथ ही, नए विधेयकों से किसानों को उनकी फसलों के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
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