
बांग्लादेश में हिंसा: शेख हसीना के समर्थकों का पुलिस के साथ टकराव, चार की मौत
हिंसा की शुरुआत
बांग्लादेश के गोपालगंज जिले में बुधवार, 16 जुलाई 2025 को हिंसक झड़पें हुईं, जब शेख हसीना के समर्थकों ने नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) की रैली को बाधित करने की कोशिश की। यह रैली पिछले साल की जनक्रांति की वर्षगांठ मनाने के लिए आयोजित की गई थी, जिसने शेख हसीना की सरकार को उखाड़ फेंका था। समर्थकों ने रैली को रोकने के लिए गोपालगंज-टेकरहट सड़क पर पेड़ गिराकर रास्ते बंद कर दिए और पुलिस पर लाठियों व ईंटों से हमला किया।
पुलिस और सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया

हिंसा को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों, जिसमें सेना और पैरामिलिट्री बीजीबी शामिल थे, ने आंसू गैस और साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। कुछ क्षेत्रों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसके परिणामस्वरूप चार लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए। मृतकों की पहचान दिप्तो साहा (25), रमजान काजी (18), सोहेल राना (30) और इमोन (24) के रूप में हुई है।
अंतरिम सरकार का बयान
अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने इस हिंसा को “पूरी तरह से अस्वीकार्य” करार दिया। उनके कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि एनसीपी की शांतिपूर्ण रैली पर हमला करने वाले शेख हसीना की अवामी लीग और उसके छात्र संगठन के सदस्यों को सजा दी जाएगी। सरकार ने गोपालगंज में 22 घंटे का कर्फ्यू लागू किया और अतिरिक्त बीजीबी प्लाटून तैनात किए।
अवामी लीग पर प्रतिबंध और राजनीतिक तनाव
शेख हसीना की अवामी लीग पर हाल ही में सभी राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, फिर भी उनके समर्थकों ने रैली को बाधित करने की कोशिश की। गोपालगंज, जो हसीना और उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान का गृहनगर है, अवामी लीग का गढ़ माना जाता है। इस घटना ने देश में गहरे राजनीतिक विभाजन को उजागर किया है, जो हसीना के निर्वासन के बाद से अशांति का सामना कर रहा है।
एनसीपी और अन्य दलों की प्रतिक्रिया
एनसीपी के समन्वयक हसनत अब्दुल्ला ने कहा कि रैली पर हमले के बाद वे पुलिस स्टेशन में शरण लेने को मजबूर हुए और उन्हें जलाने की धमकी दी गई। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी ने भी इस हिंसा की निंदा की। बीएनपी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पटरी से उतारने की साजिश करार दिया।
जांच समिति का गठन
अंतरिम सरकार ने हिंसा की जांच के लिए एक समिति गठित की है, जिसे दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। कम से कम 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, और मामला दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। यह हिंसा बांग्लादेश में चल रहे राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा की श्रृंखला का हिस्सा है, जो हसीना के शासन के पतन के बाद से जारी है।
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