
स्वरोजगार की प्रेरणा: भोरिंग की पुष्पा साहू ने रचा आत्मनिर्भरता का नया अध्याय
महासमुंद। ग्राम भोरिंग की पुष्पा साहू ने अपनी मेहनत और लगन से स्वरोजगार की ऐसी मिसाल कायम की है, जो न केवल ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही अवसर और दृढ़ इच्छाशक्ति से हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के सहयोग से पुष्पा ने स्टोन कटिंग और पॉलिशिंग उद्योग स्थापित कर आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है।
शिक्षा से उद्यमिता तक का सफर
महज दसवीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाली पुष्पा साहू ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण लिया और खादी ग्रामोद्योग विभाग, जिला पंचायत महासमुंद के माध्यम से उद्योग स्थापना के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त की। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें एक सफल उद्यमी बनाया, जो आज अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के साथ-साथ दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हैं।

आर्थिक सहायता ने बदली जिंदगी
पुष्पा ने अपने उद्योग के लिए कारपोरेशन बैंक, महासमुंद से 25 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया, जिसमें 35 प्रतिशत अनुदान शामिल था। प्रथम चरण में 7 लाख रुपये की राशि मशीन खरीद के लिए दी गई, और शेष राशि उद्योग की प्रगति के आधार पर चरणबद्ध रूप से प्रदान की गई। इस सहायता ने उनके सपनों को उड़ान दी और ज्योति स्टोन कटिंग एवं पॉलिशिंग उद्योग की नींव रखी।
आय और आत्मविश्वास का नया दौर
वर्ष 2017 में स्थापित अपने उद्योग के माध्यम से पुष्पा आज प्रति माह 18 हजार रुपये की बैंक किश्त का भुगतान कर रही हैं और लगभग 35 हजार रुपये की मासिक आय अर्जित कर रही हैं। इस आय ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि उनके जीवन को सुखमय और आत्मनिर्भर बनाया है। पुष्पा कहती हैं, “प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम ने मेरी जिंदगी को नई दिशा दी। आज मैं अपने व्यवसाय से न केवल अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हूं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ जी रही हूं।”
महिलाओं के लिए प्रेरणा
पुष्पा साहू की कहानी ग्रामीण क्षेत्रों की उन महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि इच्छाशक्ति, सरकारी योजनाओं का लाभ, और उचित मार्गदर्शन मिलने पर कोई भी अपने जीवन में बड़े बदलाव ला सकता है। पुष्पा ने केंद्र और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मुझे मिले अवसर और सहयोग ने मुझे आत्मनिर्भर बनाया। मैं चाहती हूं कि ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाएं भी इस तरह के अवसरों का लाभ उठाएं और अपने पैरों पर खड़ी हों।”
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