
नक्सलियों को बड़ा झटका: एक साल में 357 कैडर ढेर, CPI (माओवादी) ने की पुष्टि
17 जुलाई 2025
नक्सलियों का कबूलनामा
निषिद्ध कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) ने एक बयान में स्वीकार किया है कि पिछले एक साल में देश भर में विभिन्न मुठभेड़ों में उनके 357 कैडर मारे गए हैं। यह बयान पार्टी की केंद्रीय समिति द्वारा जारी किया गया है और यह हाल के इतिहास में नक्सलियों के लिए सबसे बड़े एकल-वर्षीय नुकसानों में से एक है। बस्तर रेंज के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, सुंदरराज पटलिंगम ने इसकी पुष्टि की, जिसमें कहा गया कि यह जानकारी CPI (माओवादी) द्वारा जारी 24 पेज की एक बुकलेट में सामने आई है।
दंडकारण्य में सबसे ज्यादा नुकसान
माओवादी बयान के अनुसार, मारे गए 357 कैडरों में से 281 दंडकारण्य क्षेत्र में मारे गए, जिसमें दक्षिण छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओडिशा के कुछ हिस्से शामिल हैं। इस क्षेत्र को नक्सलियों का गढ़ माना जाता है, और यहाँ हुई मुठभेड़ों ने संगठन की संरचना को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। बुकलेट में दावा किया गया है कि 80 कैडर “फर्जी मुठभेड़ों” में मारे गए, जबकि 269 “घेराबंदी हमलों” में मारे गए। इसके अलावा, 31 नागरिकों को भी मृतकों की सूची में शामिल किया गया है।
नेतृत्व को भारी क्षति
माओवादियों ने स्वीकार किया कि मारे गए कैडरों में चार केंद्रीय समिति के सदस्य और 15 विभिन्न राज्य समितियों के सदस्य शामिल हैं, जो संगठन के नेतृत्व और परिचालन कमांड के लिए एक बड़ा झटका है। इनमें सबसे प्रमुख नाम नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू का है, जो CPI (माओवादी) के महासचिव थे और 21 मई 2025 को नारायणपुर, छत्तीसगढ़ में एक मुठभेड़ में मारे गए। इसके अलावा, विवेक (प्रयाग मांझी), चालपति (रामचंद्र रेड्डी), उदय, और शर्मा जैसे वरिष्ठ नेता भी इस दौरान मारे गए या बीमारी के कारण मृत्यु हो गई।

सुरक्षा बलों की तीव्र कार्रवाई
छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय बलों ने नक्सलवाद के खिलाफ अपनी रणनीति को और सख्त कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य रखा है, जिसके तहत बस्तर और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में लगातार ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। इस साल मॉनसून के दौरान भी ऑपरेशन जारी रखे गए, जो पहले के वर्षों से अलग है। ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट जैसी कार्रवाइयों ने नक्सलियों की एकीकृत कमांड संरचना को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नक्सलियों का दावा और भविष्य की योजना

माओवादी बुकलेट में यह भी दावा किया गया है कि उनके लड़ाकों ने सरकारी बलों को भी नुकसान पहुंचाया, जिसमें 75 सुरक्षाकर्मियों की मौत और 130 के घायल होने की बात कही गई है। संगठन ने अपने कैडरों से आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीतियों को ठुकराने और “ब्राह्मणवादी हिंदुत्व फासीवाद” के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का आह्वान किया है। इसके साथ ही, 28 जुलाई से 3 अगस्त तक “शहीदी सप्ताह” मनाने की घोषणा की गई है, जिसमें स्मृति सभाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए मारे गए नेताओं को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
नक्सलवाद पर काबू पाने की राह
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि माओवादियों की हार का असली मुद्दा उनकी संख्या में कमी नहीं, बल्कि आत्मसमर्पण और गिरफ्तारियों की बढ़ती संख्या है। पुलिस का दावा है कि नक्सलियों का आंदोलन दशकों में अपने सबसे कमजोर दौर में है, जिसमें हथियारों की जब्ती और पीपुल्स लिबरेशन गोरिल्ला आर्मी (PLGA) की संरचनाओं का विघटन शामिल है। सरकार की विकास योजनाएं और स्थानीय समुदायों का सहयोग भी नक्सलवाद को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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