
छत्तीसगढ़, दिल्ली और गोवा में शराब घोटाले की जांच में छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रायपुर जोनल कार्यालय (ED-RPZO) ने 15 जुलाई 2025 को सुबह 6:30 बजे से छत्तीसगढ़, नई दिल्ली और गोवा में एक साथ सर्च और जब्ती अभियान शुरू किया। यह कार्रवाई 3,200 करोड़ रुपये के छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच के तहत की गई, जो देश में सामने आए सबसे बड़े आबकारी घोटालों में से एक है। इस ऑपरेशन में पांच अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की गई, जिसमें संदिग्ध व्यक्तियों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।
प्रमुख संदिग्धों पर नजर
छापेमारी के दौरान, ED ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में होटल सागर इंटरनेशनल के मालिक विजय अग्रवाल के आलीशान आवास और उनके भतीजे राहुल अग्रवाल के परिसरों पर तलाशी ली। इसके अलावा, नई दिल्ली में सिर बायोटेक इंडिया लिमिटेड के दो कार्यालयों और गोवा में एक आवास व एक कार्यालय पर भी छापेमारी की गई। ED को संदेह है कि विजय और राहुल अग्रवाल ने घोटाले से प्राप्त अवैध धन को शेल कंपनियों और बेनामी निवेश के जरिए वैध बनाने की कोशिश की।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और घोटाले का दायरा
यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 14 जुलाई 2025 के उस आदेश के बाद हुई, जिसमें व्यवसायी अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस घोटाले को “गंभीर” करार देते हुए ढेबर की निविदाओं को प्रभावित करने और बाजार हिस्सेदारी में हेरफेर करने की भूमिका को रेखांकित किया। राज्य की आर्थिक अपराध जांच और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SEOIACB) ने घोटाले का अनुमानित आकार 3,200 करोड़ रुपये बताया, जबकि ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के हिस्से को 2,100 करोड़ रुपये आंका है।
घोटाले का संचालन और जांच
जांच के अनुसार, यह शराब घोटाला 2019 से 2023 के बीच संचालित हुआ, जिसमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, रिटायर्ड IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, व्यवसायी अनवर ढेबर और शीर्ष आबकारी अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी जैसे हाई-प्रोफाइल आरोपी शामिल थे। ED ने दावा किया कि इस सिंडिकेट ने अवैध शराब की बिक्री, नकली होलोग्राम का उपयोग और अनधिकृत वसूली के जरिए भारी मुनाफा कमाया।
छापेमारी का नेतृत्व और जब्ती
इस ऑपरेशन का नेतृत्व ED-RPZO के संयुक्त निदेशक प्रभाकर प्रभात ने किया, जिसमें उप निदेशक हेमंत कुमार, जो इस मामले के प्रमुख जांच अधिकारी हैं, ने जमीन पर कार्रवाई को अंजाम दिया। 40 कर्मियों की टीम, जिसमें 25 सशस्त्र CRPF जवान शामिल थे, ने इस उच्च जोखिम वाली कार्रवाई को अंजाम दिया। छापेमारी में महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डेटा और अन्य साक्ष्य जब्त किए गए, जो घोटाले के वित्तीय लेनदेन को उजागर करने में मदद करेंगे।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन छापेमारियों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए ED पर BJP की “राजनीतिक एजेंट” होने का आरोप लगाया। वहीं, BJP सांसद संतोष पांडे ने दावा किया कि इस घोटाले ने राज्य के खजाने को नुकसान पहुंचाया और जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया। ED ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई साइबर अपराधों से संबंधित नहीं है, बल्कि शराब घोटाले के वित्तीय पहलुओं पर केंद्रित है।
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