
ऑपरेशन चक्र-V: साइबर अपराध के खिलाफ CBI की सात राज्यों में बड़ी कार्रवाई, तीन मुख्य आरोपी गिरफ्तार
सात राज्यों में CBI की छापेमारी
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट घोटालों के खिलाफ अपनी मुहिम ‘ऑपरेशन चक्र-V’ के तहत 16 जुलाई 2025 को सात राज्यों—दिल्ली एनसीटी, बिहार, मध्य प्रदेश, केरल, पंजाब, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में कई स्थानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में मोबाइल फोन, बैंक खाता खोलने के दस्तावेज, लेनदेन रिकॉर्ड और KYC कागजात सहित भारी मात्रा में आपत्तिजनक साक्ष्य जब्त किए गए हैं।
तीन मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी

CBI ने इस ऑपरेशन के दौरान तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो म्यूल बैंक खातों को संचालित करने और सुविधा प्रदान करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। ये खाते साइबर अपराधों से प्राप्त धन को स्थानांतरित करने और छिपाने के लिए उपयोग किए जा रहे थे। यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के वित्तीय ढांचे को ध्वस्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मामले का पंजीकरण और जांच
CBI ने विशिष्ट सूचना और सत्यापन के आधार पर 25 जून 2025 को 37 आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), भारतीय न्याय संहिता (BNS), और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। ये आरोपी, जिनमें म्यूल खाता धारक, मध्यस्थ/एजेंट और बैंक कर्मचारी शामिल हैं, साइबर अपराधियों के साथ मिलकर म्यूल खातों को खोलने और संचालित करने में शामिल थे। इससे पहले, 26 और 27 जून 2025 को 40 स्थानों पर छापेमारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।

साइबर अपराध के ढांचे पर प्रहार
CBI की यह कार्रवाई साइबर अपराध सिंडिकेट्स के बुनियादी ढांचे को नष्ट करने पर केंद्रित है, जिसमें म्यूल खातों को चिह्नित करना और निष्क्रिय करना शामिल है। ये खाते डिजिटल अरेस्ट घोटालों, प्रतिरूपण, धोखाधड़ी वाले विज्ञापनों, निवेश घोटालों और अन्य साइबर अपराधों से प्राप्त धन को स्थानांतरित करने के लिए उपयोग किए जाते हैं। जून 2025 में शुरू हुई जांच के बाद, नई सूचनाओं के आधार पर सात राज्यों में और छापेमारी की गई।
साइबर अपराध के तीन प्रमुख स्तंभ
CBI ने साइबर अपराध से निपटने के लिए एक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाया है, जो अपराध के तीन प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित है। पहला स्तंभ वित्तीय ढांचा है, जिसमें म्यूल खाते, अनधिकृत भुगतान गेटवे और फिनटेक इकोसिस्टम शामिल हैं। दूसरा स्तंभ दूरसंचार/संचार ढांचा है, जिसमें म्यूल सिम कार्ड, अवैध सिम सक्रियण में शामिल पॉइंट-ऑफ-सेल (PoS) एजेंट और ऐसे सिम कार्ड प्रदान करने वाले नेटवर्क शामिल हैं। तीसरा स्तंभ मानव संसाधन नेटवर्क है, जो साइबर अपराधों के लिए लोगों की भर्ती और शोषण करने वाले संगठित सिंडिकेट्स को लक्षित करता है, जिसे ‘साइबर स्लेवरी’ के रूप में जाना जाता है। यह तीसरा स्तंभ ज्यादातर भारत की सीमाओं के बाहर संचालित होता है।
सरकार की प्रतिबद्धता
यह कार्रवाई भारत सरकार की साइबर अपराध और इसके अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की निरंतर प्रतिबद्धता का हिस्सा है। सरकार का विशेष जोर ऐसे अपराधों को सक्षम करने वाले बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने पर है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों को संबंधित अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा, और जांच अभी भी जारी है।
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