
नशे में धुत्त मिला स्कूल का प्रधानपाठक, ग्रामीणों में आक्रोश, पुलिस ने पहुंचाया थाने
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में एक शासकीय प्राथमिक शाला के प्रभारी प्रधानपाठक के नशे में धुत्त होने की घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम देवरी में पदस्थ प्रभारी प्रधानपाठक रेशमलाल बेरवंशी के खिलाफ ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद कार्रवाई की गई। इस घटना ने स्थानीय समुदाय में आक्रोश पैदा कर दिया है, और लोग दोषी शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
शिकायतों के बाद हुई कार्रवाई
ग्राम सरपंच तेजराम वर्मा ने बताया कि प्रधानपाठक के नशे में स्कूल आने की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। इसके बाद उन्होंने विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) नीलम राजपूत और डायल 112 को सूचित किया। डायल 112 की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रधानपाठक को स्कूल परिसर से हिरासत में लिया और बीईओ के निर्देश पर गठित निरीक्षण दल ने उन्हें खैरागढ़ थाने पहुंचाया।

मेडिकल जांच के लिए भेजा गया
हिरासत में लेने के बाद रेशमलाल बेरवंशी को सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। इस जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि वह नशे की हालत में थे या नहीं। हालांकि, इस मामले में अभी तक मेडिकल रिपोर्ट की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
अधिकारियों का बयान
विकासखंड शिक्षा अधिकारी नीलम राजपूत ने संवैधानिक बाध्यताओं का हवाला देते हुए इस मामले पर सार्वजनिक बयान देने से इनकार कर दिया। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी लालजी द्विवेदी ने कहा कि उन्हें इस घटना की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन मामले की जांच की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
ग्रामीणों में गुस्सा, कार्रवाई की मांग
इस घटना ने ग्राम देवरी के निवासियों में गहरा रोष पैदा किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास कर रही है, तब ऐसे शिक्षक स्कूल को नशे का अड्डा बनाकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषी प्रधानपाठक के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और बच्चों की शिक्षा सुरक्षित रहे।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
यह घटना शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और शिक्षकों की जवाबदेही पर सवाल उठाती है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल बच्चों के भविष्य को संवारने का स्थान है, और ऐसे गैर-जिम्मेदार व्यवहार से न केवल शिक्षा का स्तर प्रभावित होता है, बल्कि बच्चों के मन पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। इस मामले में प्रशासन की ओर से की जाने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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