
दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा स्नेहा देनाथ की यमुना नदी में मिली लाश, अंतिम संदेश ने छोड़ा सवाल
दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा स्नेहा देनाथ की यमुना नदी में मृत पाए जाने की खबर ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। 22 वर्षीय स्नेहा, जो डीयू के हिंदू कॉलेज में बीए (ऑनर्स) की तृतीय वर्ष की छात्रा थीं, ने अपने दोस्तों को एक अंतिम संदेश भेजा, जिसमें उन्होंने अपनी मानसिक परेशानियों का जिक्र किया था। इसके बाद वह अचानक लापता हो गईं। पुलिस ने शनिवार देर रात यमुना नदी के किनारे उनका शव बरामद किया, जिसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया है।
दोस्तों ने बताई स्नेहा की मानसिक और आर्थिक परेशानियां
स्नेहा के करीबी दोस्तों ने बताया कि वह पिछले कई महीनों से मानसिक और आर्थिक तनाव से जूझ रही थीं। उनके एक दोस्त, रिया शर्मा, ने बताया कि स्नेहा ने हाल ही में अपनी पढ़ाई के खर्च और पारिवारिक दबावों के बारे में बात की थी। स्नेहा ने अपने अंतिम संदेश में लिखा था, “मैं अब और नहीं सह सकती, सब कुछ खत्म करने जा रही हूं।” दोस्तों का कहना है कि उन्होंने कई बार स्नेहा को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी समस्याओं को साझा करने में हिचकिचाती थीं।
पुलिस जांच शुरू, आत्महत्या या हत्या का रहस्य
दिल्ली पुलिस ने स्नेहा के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है। हालांकि, पुलिस ने हत्या की संभावना को भी खारिज नहीं किया है। यमुना नदी के किनारे स्नेहा का मोबाइल और बैग भी बरामद हुआ, जिसमें उनका अंतिम संदेश उनके दोस्तों को भेजा गया था। पुलिस ने स्नेहा के परिवार, दोस्तों और कॉलेज प्रशासन से पूछताछ शुरू कर दी है ताकि इस मामले की तह तक जाया जा सके।
कॉलेज प्रशासन पर सवाल, मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी
स्नेहा की मौत ने दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को उजागर किया है। हिंदू कॉलेज के छात्रसंघ ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि कॉलेज में काउंसलिंग सेवाएं अपर्याप्त हैं। छात्रसंघ के अध्यक्ष अमन सिंह ने कहा, “हमने कई बार कॉलेज प्रशासन से काउंसलिंग सेंटर को मजबूत करने की मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।” छात्रों ने स्नेहा की याद में एक कैंडल मार्च निकाला और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की मांग की।
परिवार का बयान, स्नेहा को बताया होनहार छात्रा
स्नेहा के परिवार ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उनके पिता, सुजीत देनाथ, ने बताया कि स्नेहा पढ़ाई में बहुत होनहार थी और हमेशा अपने सपनों को पूरा करने की बात करती थी। उन्होंने कहा, “हमें नहीं पता कि उसने ऐसा कदम क्यों उठाया। हम चाहते हैं कि इसकी पूरी जांच हो और सच्चाई सामने आए।” स्नेहा के परिवार ने सरकार से अपील की है कि विश्वविद्यालयों में छात्रों के लिए बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया, जागरूकता की मांग
इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा छेड़ दी है, जहां #JusticeForSneha और #MentalHealthMatters जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों और छात्र संगठनों ने सरकार से मांग की हैॽ कि कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर संसाधन और जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए जाएं। दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने इस मामले पर दुख जताया और आश्वासन दिया कि सरकार इस मामले की गहन जांच करेगी और विश्वविद्यालयों में काउंसलिंग सेवाओं को बेहतर करने के लिए कदम उठाएगी।
आगे की जांच और समाज से अपील
पुलिस ने इस मामले में स्नेहा के मोबाइल डेटा और सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच शुरू कर दी है ताकि उनके अंतिम दिनों की गतिविधियों का पता लगाया जा सके। इस बीच, स्नेहा के दोस्तों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लोगों से अपील की है कि वे मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को गंभीरता से लें और जरूरत पड़ने पर मदद मांगें। इस घटना ने एक बार फिर समाज को यह सोचने पर मजबूर किया है कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना कितना जरूरी है।
👉 हमारे WhatsApp channel से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👇👇
https://whatsapp.com/channel/0029VbALQC677qVNwdR5Le3V



