
दृश्यम फिल्म से प्रेरित: तेलंगाना में 55 लाख रुपये के बीमा के लिए सास की हत्या; सीसीटीवी, फोरेंसिक, वाहन ट्रैकिंग ने खोला फर्जी दुर्घटना का राज
हैरान करने वाला अपराध
तेलंगाना के सिद्दीपेट जिले में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने अपनी सास की हत्या कर दी और इसे सड़क दुर्घटना के रूप में पेश करने की कोशिश की। इस अपराध में प्रेरणा मलयालम फिल्म ‘दृश्यम’ से ली गई थी, जिसमें एक व्यक्ति साक्ष्य छिपाकर अपराध को अंजाम देता है। लेकिन वास्तविक जीवन में यह योजना विफल रही, और पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक विश्लेषण और वाहन ट्रैकिंग के जरिए अपराध का पर्दाफाश कर दिया।
बीमा राशि के लिए रची साजिश
आरोपी, जिसकी पहचान वेंकटेश के रूप में हुई है, ने अपनी 60 वर्षीय सास रामव्वा के नाम पर मार्च में डाकघर और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से 55 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी ली थी। उसने अपनी सास को वित्तीय सुरक्षा का झांसा देकर ये पॉलिसी खरीदवाई थी। इसके अलावा, वह रायथु बीमा योजना का लाभ भी लेना चाहता था, जो तेलंगाना सरकार की किसानों के लिए बीमा योजना है। उसका मकसद इस राशि को हड़पना था।
हत्या को दुर्घटना के रूप में पेश करने की कोशिश
7 जुलाई को, वेंकटेश ने अपनी सास को खेत में ले गया, यह कहकर कि एक बिजली कनेक्शन के लिए उनके हस्ताक्षर की जरूरत है। जब कोई अधिकारी नहीं आया, तो उसने रामव्वा को अकेले घर लौटने के लिए कहा। योजना के तहत, उसके छोटे भाई करुणाकर ने एक किराए की एसयूवी से रामव्वा को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। दोनों ने इसे हिट-एंड-रन दुर्घटना के रूप में पेश करने की कोशिश की।
सीसीटीवी और फोरेंसिक ने खोली पोल

पुलिस को इस मामले में संदेह हुआ और उन्होंने आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच की। फुटेज में एक एसयूवी को रामव्वा को टक्कर मारते हुए देखा गया, जो किराए पर ली गई थी। वाहन की पंजीकरण संख्या और जीपीएस डेटा ने पुलिस को वेंकटेश और उसके भाई तक पहुंचाया। फोरेंसिक विश्लेषण ने भी इस बात की पुष्टि की कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं थी। पूछताछ के दौरान, दोनों ने अपराध स्वीकार किया और बताया कि वे ‘दृश्यम’ फिल्म से प्रेरित थे।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
सिद्दीपेट पुलिस आयुक्त बी. अनुराधा ने बताया कि इस मामले को थोगुता के सीआई लतीफ और एसआई रविकांत की टीम ने गजवेल एसीपी नरसिम्हुलु के नेतृत्व में सुलझाया। पुलिस ने डायल 100 पर मिली सूचना के आधार पर तुरंत कार्रवाई शुरू की और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों को पकड़ा। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि अपराध कितना भी सुनियोजित क्यों न हो, आधुनिक तकनीक और पुलिस की सतर्कता इसे बेनकाब कर देती है।
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