
भिलाई में ‘जहरीला पानी’ का संकट: फैक्ट्रियों के खिलाफ प्रदर्शन, वार्डवासियों ने उठाई आवाज
12 जुलाई 2025
छावनी के इंडस्ट्रियल एरिया में बोर से निकल रहा केमिकल युक्त पानी
भिलाई के छावनी क्षेत्र में इंडस्ट्रियल एरिया के बोरवेल से केमिकल मिश्रित पानी निकलने की समस्या ने स्थानीय निवासियों को परेशान कर दिया है। 12 जुलाई 2025 को, स्थानीय पार्षद के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने इस मुद्दे के खिलाफ प्रदर्शन किया। निवासियों का कहना है कि यह जहरीला पानी उनके स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा बन रहा है।
फैक्ट्रियों की लापरवाही से बढ़ा संकट
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि स्थानीय फैक्ट्रियों द्वारा रासायनिक कचरे का उचित निपटान नहीं किया जा रहा, जिसके कारण भूजल दूषित हो रहा है। भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) और आसपास की छोटी औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले रसायनों ने पानी को जहरीला बना दिया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि पानी का रंग और गंध असामान्य है, जिससे पीने और घरेलू उपयोग के लिए इसका इस्तेमाल असंभव हो गया है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा गंभीर असर
निवासियों का कहना है कि दूषित पानी के कारण कई लोग त्वचा रोग, सांस की समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर इसका प्रभाव अधिक देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल इस समस्या का समाधान करे और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करे। कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि लंबे समय तक इस पानी के उपयोग से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
प्रशासन पर उठे सवाल, कार्रवाई की मांग
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि फैक्ट्रियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और रासायनिक कचरे के निपटान के लिए कड़े नियम लागू किए जाएं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
भिलाई स्टील प्लांट का पर्यावरणीय प्रभाव
भिलाई स्टील प्लांट, जो क्षेत्र का प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, पहले भी पर्यावरणीय प्रदूषण के लिए आलोचना का शिकार रहा है। 2014 में हुए एक गैस रिसाव ने छह लोगों की जान ले ली थी, और हाल के वर्षों में प्लांट के उत्सर्जन और अपशिष्ट निपटान की प्रक्रियाओं पर सवाल उठे हैं। निवासियों ने मांग की है कि प्लांट और अन्य फैक्ट्रियों को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाने के लिए मजबूर किया जाए।
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