
CBI ने 1.44 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में आरोपी को हिरासत में लिया, 20 साल बाद अमेरिका से प्रत्यर्पण
9 जुलाई 2025
मामला क्या है?
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 26 साल से फरार चल रही मोनिका कपूर को आखिरकार हिरासत में ले लिया है। मोनिका कपूर पर 1998 में 1.44 करोड़ रुपये की आयात-निर्यात धोखाधड़ी का आरोप है। यह मामला तब सामने आया जब मोनिका ने अपने भाइयों, रजन खन्ना और राजीव खन्ना के साथ मिलकर फर्जी निर्यात दस्तावेज तैयार किए और ड्यूटी-मुक्त सोने के आयात के लिए छह रीप्लेनिशमेंट लाइसेंस हासिल किए। इन लाइसेंसों को अहमदाबाद की एक फर्म, दीप एक्सपोर्ट्स को प्रीमियम पर बेचा गया, जिससे सरकारी खजाने को 1.44 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
अमेरिका से प्रत्यर्पण
मोनिका कपूर 1999 में अपने दो छोटे बच्चों के साथ अमेरिका भाग गई थीं, जहां उन्होंने 26 साल तक भारतीय अधिकारियों से बचकर रहने में सफलता पाई। CBI ने 2010 में उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया और अमेरिकी अधिकारियों से प्रत्यर्पण की मांग की। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, 9 जुलाई 2025 को अमेरिका के न्यूयॉर्क के पूर्वी जिला न्यायालय ने भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि के तहत उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी दी। CBI की एक टीम ने अमेरिका में मोनिका को हिरासत में लिया और उन्हें एक अमेरिकन एयरलाइंस की उड़ान से भारत लाया गया।
कानूनी कार्रवाई और आरोप
CBI ने 31 मार्च 2004 को मोनिका कपूर और उनके भाइयों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान दस्तावेजों की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), और 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग) के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था। उनके भाई, रजन और राजीव खन्ना को साकेत जिला अदालत ने 20 दिसंबर 2017 को दोषी ठहराया था। हालांकि, मोनिका जांच और मुकदमे में शामिल नहीं हुईं, जिसके बाद उन्हें 2006 में भगोड़ा घोषित किया गया और 2010 में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया।
मोनिका कपूर की कहानी
मोनिका कपूर दिल्ली की एक व्यवसायी थीं और उनकी फर्म, मोनिका ओवरसीज, आयात-निर्यात के कारोबार में थी। CBI के अनुसार, उन्होंने और उनके भाइयों ने 1998 में फर्जी शिपिंग बिल, चालान, और बैंक निर्यात प्रमाणपत्र तैयार किए, जिससे 2.36 करोड़ रुपये मूल्य के ड्यूटी-मुक्त सोने के आयात लाइसेंस प्राप्त किए गए। मोनिका ने अमेरिका में रहते हुए राजनीतिक उत्पीड़न और भारत में यातना के डर का हवाला देकर शरण मांगी थी, लेकिन अमेरिकी अदालतों ने उनके दावों को खारिज कर दिया।
CBI का बयान
CBI ने अपने बयान में कहा, “मोनिका कपूर का प्रत्यर्पण न्याय की दिशा में एक बड़ी सफलता है और यह दर्शाता है कि CBI आर्थिक अपराधियों को अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार भी कानून के सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है।” एजेंसी ने जोर देकर कहा कि वह आर्थिक अपराधों से निपटने और भगोड़ों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए सभी कानूनी रास्तों का उपयोग करेगी। मोनिका कपूर को अब भारत में संबंधित अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा, जहां उन पर मुकदमा चलेगा।
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