
बिहार में ‘जंगल राज’ की वापसी? तीन दिनों में 10 हत्याओं ने मचाया हड़कंप
9 जुलाई 2025
अपराध की लहर ने बिहार को झकझोरा
बिहार में हाल के तीन दिनों में 10 हत्याओं ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है। इनमें से कई मामले अत्यंत क्रूर और संगठित अपराध की ओर इशारा करते हैं। पटना में व्यवसायी गोपाल खेमका की हत्या से लेकर सीवान में तलवारबाजी से तीन लोगों की मौत और नालंदा में डबल मर्डर ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
गोपाल खेमका हत्याकांड: अपराधियों का दुस्साहस
पटना के गांधी मैदान जैसे व्यस्त इलाके में व्यवसायी गोपाल खेमका की गोली मारकर हत्या ने अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस को उजागर किया है। पुलिस ने मुख्य शूटर उमेश उर्फ विजय को गिरफ्तार कर लिया है, और मामले में एक बिल्डर आशोक साह को भी हिरासत में लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, यह हत्या कारोबारी विवाद से जुड़ी थी।
विपक्ष का हमला: ‘राक्षस राज’ का आरोप
विपक्षी दलों ने इन हत्याओं को लेकर नीतीश कुमार सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार को “भारत की अपराध राजधानी” करार दिया, जबकि राजद नेता तेजस्वी यादव ने इसे ‘गुंडा राज’ की संज्ञा दी। विपक्ष का कहना है कि सरकार कानून-व्यवस्था को संभालने में पूरी तरह विफल रही है।
उपमुख्यमंत्री का जवाब: ‘जंगल राज’ के आरोपों का खंडन
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ‘जंगल राज’ के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार अपराध को नियंत्रित करने के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया। सिन्हा ने दावा किया कि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई मामलों में संदिग्धों को हिरासत में लिया है।
जनता में भय, व्यापारियों में आक्रोश
बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष आशीष शंकर ने पुलिस की देरी से पहुंचने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि गांधी मैदान जैसे इलाके में हत्या होना ‘जंगल राज’ की याद दिलाता है। व्यापारी समुदाय ने सुरक्षा की मांग की है, जिसके जवाब में मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने सुरक्षा के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
क्या है आगे की राह?
इन घटनाओं ने बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। जनता में बढ़ते अपराध को लेकर आक्रोश है, और सरकार पर दबाव है कि वह ठोस कदम उठाए। विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन और पुलिस की सक्रियता से कुछ राहत की उम्मीद है, लेकिन सवाल यह है कि क्या बिहार वाकई ‘जंगल राज’ की ओर बढ़ रहा है?
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