
यूनिवर्सिटी के फर्जी डिग्री रैकेट का पर्दाफाश, चेयरमैन सहित 10 गिरफ्तार
6 जुलाई 2025
फर्जी डिग्री रैकेट का भंडाफोड़
उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने हापुड़ की मोनाड यूनिवर्सिटी में चल रहे एक बड़े फर्जी डिग्री रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में यूनिवर्सिटी के चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह रैकेट विभिन्न कोर्सेज जैसे एलएलबी, बी.फार्मा, डी.फार्मा और बी.टेक की फर्जी डिग्रियां बनाकर बेच रहा था, जिनकी कीमत 50,000 रुपये से 5 लाख रुपये तक थी।
चेयरमैन का आपराधिक इतिहास
विजेंद्र सिंह हुड्डा, जो पहले कुख्यात बाइक बोट घोटाले में भी आरोपी रह चुके हैं, इस फर्जी डिग्री रैकेट के मुख्य सरगना के रूप में सामने आए हैं। 2018 में बाइक बोट घोटाले में हजारों करोड़ की धोखाधड़ी के बाद वह लंदन भाग गए थे और उनके खिलाफ 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। 2022 में जमानत मिलने के बाद उन्होंने मोनाड यूनिवर्सिटी के जरिए फर्जी डिग्रियों का कारोबार शुरू किया।
हजारों फर्जी डिग्रियां जब्त
एसटीएफ की छापेमारी में 1,372 फर्जी डिग्रियां, 262 फर्जी प्रोविजनल और माइग्रेशन सर्टिफिकेट, 14 मोबाइल फोन और सात लैपटॉप जब्त किए गए। जांच में पता चला कि हुड्डा के निर्देश पर हरियाणा के संदीप सहरावत नामक व्यक्ति 5,000 रुपये प्रति डिग्री के हिसाब से फर्जी दस्तावेज छापता था, जिन्हें बाद में यूनिवर्सिटी के अधिकारियों द्वारा 4 लाख तक में बेचा जाता था।
जांच और कानूनी कार्रवाई
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), 336, 338, 340 (जालसाजी) और 111 (संगठित अपराध) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। एसटीएफ के अतिरिक्त महानिदेशक अमिताभ यश ने बताया कि जांच अभी भी जारी है और अन्य संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। यह रैकेट कई राज्यों में फैला हुआ था, और कई लोगों ने इन फर्जी डिग्रियों के जरिए नौकरियां हासिल की थीं।
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