March 2, 2026
छत्तीसगढ़ के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हॉस्टल संकट, छात्रों का भविष्य खतरे में

छत्तीसगढ़ के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हॉस्टल संकट, छात्रों का भविष्य खतरे में

Jul 4, 2025

रायपुर, 3 जुलाई 2025

हॉस्टल सुविधाओं की भारी कमी

छत्तीसगढ़ के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हॉस्टल सुविधाओं की गंभीर कमी ने सैकड़ों मेडिकल छात्रों के शैक्षणिक, आर्थिक और मानसिक स्वास्थ्य को जोखिम में डाल दिया है। एक जांच के अनुसार, राज्य में मेडिकल छात्रों की संख्या में तेजी से वृद्धि के बावजूद सभी 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बुनियादी आवास सुविधाएं प्रदान करने में विफलता देखी गई है।

रायपुर में सबसे गंभीर स्थिति

पं. जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (Pt. JNMMC), रायपुर में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। यहां 820 में से 524 छात्रों (365 पुरुष और 159 महिला) को हॉस्टल नहीं मिला है। कई छात्रों को 5,000 से 10,000 रुपये मासिक किराए पर निजी आवास लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा, अस्पताल राउंड में देरी और पढ़ाई पर ध्यान देने में कठिनाई हो रही है।

अन्य कॉलेजों में भी बदहाल स्थिति

  • चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, दुर्ग: 2025 बैच के लिए हॉस्टल सुविधा उपलब्ध कराने में असमर्थता की घोषणा की गई, जिससे नए NEET क्वालिफायर्स में चिंता बढ़ गई है।
  • लेट बिसाहू दास महंत मेमोरियल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, कोरबा: आधिकारिक दावों के बावजूद कि कोई आवंटन बाकी नहीं है, लगभग सभी छात्रों को कैंपस से दूर किराए के निजी भवनों में रखा गया है, जिससे पर्यवेक्षण और सुरक्षा की चिंता बढ़ गई है।
  • छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (CIMS), बिलासपुर: हालांकि आधिकारिक तौर पर “बैकलॉग-मुक्त” दावा किया गया है, लेकिन छात्रों ने कमरों में अत्यधिक भीड़ और खराब बुनियादी ढांचे की शिकायत की है, जिससे स्वच्छता और पढ़ाई की स्थिति प्रभावित हो रही है।
  • लेट बालिराम कश्यप मेमोरियल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, जगदलपुर: 100 छात्रों को हॉस्टल नहीं मिला है, कुछ को एक कमरे में तीन लोगों के साथ रहना पड़ रहा है, जो सुरक्षा और गरिमा के मानकों का उल्लंघन है।

सुरक्षा और सुविधाओं की कमी

छात्रावासों, विशेष रूप से लड़कियों के हॉस्टल में, सुरक्षा और वार्डन की कमी है। सीसीटीवी कैमरे न होने और शिकायत निवारण तंत्र की अनुपस्थिति ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) के संरक्षक डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा, “हॉस्टल कोई उपकार नहीं, बल्कि नियामक आवश्यकता हैं। देरी से NEET सीटों में कटौती और NMC की चेतावनियों का खतरा है।”

छात्रों का विरोध और मांगें

छात्रों ने हॉस्टल निर्माण को शीघ्र पूरा करने और परीक्षा शुल्क वृद्धि को वापस लेने की मांग को लेकर रायपुर में मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की उपस्थिति में आयोजित डॉक्टर्स डे कार्यक्रम के दौरान विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने डीन को पत्र लिखकर हॉस्टल सुविधा या किराया भत्ता (Hostel Rent Allowance) प्रदान करने की मांग की, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।

सरकार पर दबाव

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन और छात्रों ने स्वास्थ्य मंत्री की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए, उनका कहना है कि दिखावे और बड़े आयोजनों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जबकि मूलभूत चुनौतियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। X पर चल रही चर्चाओं के अनुसार, 3,600 से अधिक छात्र हॉस्टल आवास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। छात्रों ने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप और वैकल्पिक व्यवस्था या किराया भत्ता प्रदान करने की मांग की है।

भविष्य पर खतरा

यह संकट सैकड़ों मेडिकल छात्रों के शैक्षणिक भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की चेतावनियों और सीटों में कटौती का खतरा बढ़ सकता है। राज्य सरकार से तत्काल और व्यापक कार्रवाई की आवश्यकता है।

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